उदयपुर: सावन का पवित्र महीना चल रहा है और इसी अवसर पर देश के प्राचीन शिव मंदिरों से रूबरू करवा रहा है. आज हम आपको ले चलते हैं राजस्थान के उदयपुर जिले के बड़गांव क्षेत्र में स्थित एक अद्भुत और रहस्यमयी शिव मंदिर पातालेश्वर महादेव मंदिर की ओर. यह मंदिर न सिर्फ अपनी प्राचीनता के लिए बल्कि गुफा में स्थित अलौकिक शिवलिंग और उससे जुड़ी चमत्कारी घटनाओं के लिए जाना जाता है. देश-दुनिया से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं और सावन के इस पावन समय में तो यहां का माहौल भक्तिमय ऊर्जा से सराबोर हो जाता है.
गुफा में प्रकट हुआ शिवलिंग: मंदिर के पुजारी पंडित खेमराज गमेती बताते हैं कि यह मंदिर यूं ही अस्तित्व में नहीं आया. वर्ष 1960 के आसपास मंदिर के पीछे एक कमरे का निर्माण कार्य चल रहा था. खुदाई के दौरान एक तीन फीट चौड़ी गुफा प्रकट हुई. उसी रात पुजारी को स्वप्न में संकेत मिला कि इस गुफा में कोई खजाना छिपा है. उन्होंने अपने तीन मित्रों को यह बात बताई और सभी ने मिलकर गुफा में प्रवेश किया. अंदर मलबे के बीच एक चट्टाननुमा आकृति मिली, जो नजदीक जाकर देखने पर शिवलिंग निकली. यह कोई साधारण खजाना नहीं, बल्कि आस्था का अद्वितीय प्रतीक था. तभी से यह स्थान ‘पातालेश्वर महादेव’ के नाम से जाना जाने लगा.
गुफा में विराजित भोलेनाथ: पातालेश्वर महादेव मंदिर एक आम शिवधाम जैसा नहीं है. यह गुफा की गहराई में स्थित है, जहां स्वयं भोलेनाथ पातालेश्वर रूप में विराजमान हैं. इस गुफा के ऊपर से मदार नहर बहती है और इसका वर्षा जल फतेहसागर झील में जाकर मिलता है. पहले यह पानी गुफा में भर जाता था और श्रद्धालुओं को पानी में उतरकर दर्शन करने होते थे, लेकिन अब गुफा तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां और रेलिंग बना दी गई हैं, जिससे भक्त सहजता से नीचे जाकर भगवान के दर्शन कर सकते हैं.
गुफा का रहस्य और पाताल लोक की मान्यता: शिवलिंग के ठीक पीछे एक और गहरी गुफा है, जिसका अंत आज तक कोई नहीं जान पाया. यह रहस्य ही मंदिर की विशेषता बन गया है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यह गुफा पाताल लोक से जुड़ी हो सकती है, इसलिए यहां के भगवान को ‘पातालेश्वर’ कहा जाता है. सावन के दौरान यह स्थान भक्ति और अध्यात्म की ऊर्जा से भर जाता है. हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु दूर-दराज़ से यहां भगवान शिव का जलाभिषेक करने आते हैं और मनोकामना मांगते हैं.
मंदिर से जुड़े श्रद्धालु संदीप बताते हैं कि यह मंदिर बेहद प्राचीन और चमत्कारी है. यहां भगवान भोलेनाथ का दरबार हर दिन भक्तों से भरा रहता है. दर्शन मात्र से ही लोगों को मानसिक और शारीरिक शांति मिलती है. उनका कहना है कि जो भी यहां सच्चे मन से मन्नत मांगता है, उसकी हर कामना भगवान पूरी करते हैं. सावन में तो यहां भक्तों की भारी भीड़ देखी जाती है. हर रोज जलाभिषेक, मंत्रोच्चार और पूजा का दौर चलता रहता है, जिससे पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है.




















