राजस्थान में एक बार फिर सट्टा, ज़मीन विवाद और संगठित अपराध की शक्ल में अपराध की नई परतें सामने आई हैं। अजमेर निवासी प्रॉपर्टी डीलर अमित खंडेलवाल का मंगलवार दोपहर सीकर जिले के लामिया क्षेत्र से उस वक्त अपहरण कर लिया गया, जब वह खाटूश्यामजी के दर्शन कर अजमेर लौट रहे थे। उनके साथ एक महिला प्रेरणा भी मौजूद थीं, जो इस वारदात की चश्मदीद गवाह बनीं। अपहरण की पूरी घटना दिनदहाड़े, बेहद फिल्मी स्टाइल में हुई—लेकिन इसका पर्दा अब भी रहस्य के घने धुएं में छिपा हुआ है।
वर्दी में आए थे अपहरणकर्ता
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि महिला प्रेरणा के मुताबिक, जिन लोगों ने अमित को अगवा किया, वे पुलिस की वर्दी में थे। चार की संख्या में रहे अपहरणकर्ता एक दूसरी कार में सवार थे और उन्होंने अमित की कार को रास्ते में रोका। अमित को जबरन गाड़ी से खींचकर ले जाया गया और प्रेरणा को वहीं छोड़ दिया गया। इस दौरान महिला के मुताबिक उन्होंने खुद को असहाय महसूस किया और जैसे-तैसे पास के ग्रामीणों से मदद लेकर पुलिस को सूचना दी।
पुराने मामलों से जुड़ रहे हैं तार
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अमित खंडेलवाल का नाम कुछ पुराने सट्टा और आर्थिक लेन-देन के मामलों से जुड़ा रहा है। वहीं, अमित का भाई बंटी हलवाई उर्फ बंटी खंडेलवाल भी शक के दायरे में है, जो फिलहाल विदेश में रहकर क्रिकेट सट्टा कारोबार में संलिप्त बताया जाता है। पुलिस को शक है कि यह अपहरण बंटी से फिरौती वसूलने या अमित की जमीन से जुड़ी किसी रंजिश का परिणाम हो सकता है। यानी मामला केवल सड़क पर हुई आपराधिक वारदात भर नहीं, बल्कि इसकी जड़ें अंतरराष्ट्रीय सट्टा सिंडिकेट या गहरे रियल एस्टेट विवादों में भी हो सकती हैं।
पुलिस की तेजी और सन्नाटा दोनों
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने रिंगस, खाटूश्यामजी, सीकर और अजमेर की सीमाओं पर नाकाबंदी कर दी। आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट सुराग पुलिस के हाथ नहीं लगा है। अमित की कार की फॉरेंसिक जांच और प्रेरणा से पूछताछ के बाद पुलिस कई संभावित एंगल पर काम कर रही है—जिनमें ज़मीन विवाद, फिरौती, पारिवारिक रंजिश और सट्टेबाजी जैसे सभी पक्ष शामिल हैं।
परिवार की चुप्पी, मोहल्ले में फुसफुसाहट
अमित खंडेलवाल के अजमेर स्थित घर पर सन्नाटा पसरा हुआ है। उनकी पत्नी और बच्चे बेहद सदमे में हैं, लेकिन मीडिया से बात करने से पूरी तरह इनकार कर रहे हैं। मोहल्ले में मौजूद कुछ लोगों ने दबी जुबान में बताया कि अमित का कुछ समय से कुछ लोगों के साथ पैसों को लेकर विवाद चल रहा था। वहीं, बंटी खंडेलवाल का नाम पहले भी विवादों से जुड़ चुका है। ऐसे में यह घटना एक सुनियोजित और रची गई साजिश लग रही है।
सस्पेंस बना हुआ है गहरा
अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अपहरणकर्ता वास्तव में वर्दीधारी पुलिसकर्मी थे या फिर उन्होंने केवल वर्दी पहनकर विश्वास और भय पैदा करने की कोशिश की। क्या अमित को ज़िंदा और सुरक्षित वापस लाया जा सकेगा? क्या इसके पीछे केवल फिरौती है या इसके पीछे कोई गहरी गैंगवार छिपी है? इन सभी सवालों के जवाब फिलहाल अंधेरे में हैं।
राजस्थान पुलिस की चुनौतियाँ इस मामले में काफी बढ़ चुकी हैं—क्योंकि यह एक साधारण अपहरण नहीं, बल्कि संगठित अपराध, नकली वर्दी, सट्टा सिंडिकेट और जमीन की साजिशों की जटिल परतों से जुड़ा हो सकता है। हर मिनट अहम है और पुलिस की पहली प्राथमिकता अमित को सुरक्षित दस्तयाब करना है।
लेकिन सवाल अब भी वहीं खड़ा है—क्या यह अपहरण है या किसी बड़े अपराध की शुरुआत?




















