कहते हैं कि अगर जिद जुनून बन जाए, तो सफलता कदम चूमती है. इस वाक्य को सचिन कुमार बैरवा (Sachin Kumar Bairwa) ने सही साबित कर दिखाया है. राजस्थान के बूंदी जिले के एक छोटे से गांव देवपुरा से ताल्लुक रखने वाले सचिन ने एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जो न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे गांव के लिए गर्व की बात है. उन्होंने 25 वर्ष की उम्र में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की परीक्षा पास करने वाले अपने गांव के पहले व्यक्ति बन गए हैं.
पिता ने पढ़ाई के लिए बेची पुश्तैनी ज़मीन
सचिन के पिता हीरालाल बैरवा ने बेटे की पढ़ाई को प्राथमिकता देते हुए तीन बीघा पुश्तैनी ज़मीन बेच दी. उन्होंने यह फैसला उस समय लिया, जब गांव में किसी को भी सीए कोर्स के बारे में जानकारी नहीं थी. लेकिन स्कूल में सचिन के प्रदर्शन को देखकर शिक्षकों ने भी उनके पिता को यह कदम उठाने के लिए प्रेरित किया.
हिंदी मीडियम से शुरू किया सफर, कोटा में मिली नई दिशा
सचिन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल से और बाद की पढ़ाई पास के तलवास गांव से पूरी की. साल 2014 में वे बूंदी आए, जहां उनकी मुलाकात ट्यूटर मनीष अग्रवाल से हुई. यहीं से उनका करियर एक नई दिशा में बढ़ा. मनीष ने उन्हें कॉमर्स की पढ़ाई करने और सीए बनने के लिए प्रेरित किया.
इंदौर और जयपुर में की कठिन तैयारी
सचिन ने कॉमन प्रोफिशिएंसी टेस्ट (CPT) की तैयारी की शुरुआत की, जिसे भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है. मनीष अग्रवाल ने उन्हें इंदौर भेजा, जहां उन्होंने दो साल तक सीए के पहले ग्रुप की तैयारी की और नवंबर 2018 में दूसरे प्रयास में परीक्षा पास की. इसके बाद उन्होंने जयपुर में तीन साल की आर्टिकलशिप की और मुख्य परीक्षा की तैयारी भी जारी रखी.
दूसरे प्रयास में मिली सफलता, 324 अंक प्राप्त किए
वर्ष 2025 में घोषित हुए परिणाम में सचिन ने 324 अंक हासिल करते हुए अपना दूसरा प्रयास सफल बनाया, उन्होंने न केवल अपने पिता के सपने को साकार किया, बल्कि गांव के युवाओं के लिए एक मिसाल भी कायम की. सचिन बताते हैं कि परिवार और समाज के कई लोगों ने उन्हें सरकारी नौकरी की तैयारी करने और पटवारी बनने की सलाह दी क्योंकि वे आरक्षित श्रेणी से आते हैं. लेकिन उन्होंने दृढ़ निश्चय करते हुए सीए बनने का फैसला लिया और उसी रास्ते पर मेहनत करते रहे.
“पिता की बेची ज़मीन का दोगुना वापस खरीदूंगा”
अपनी सफलता पर सचिन ने भावुक होकर कहा कि अब मेरा लक्ष्य है कि मैं वो ज़मीन जो मेरे पिता ने मेरी पढ़ाई के लिए बेची थी, उससे दोगुनी ज़मीन वापस खरीदूं. यह केवल उनका सपना नहीं, बल्कि उनके पिता के संघर्ष का भी सम्मान है. हीरालाल बताते हैं कि गांव के लोग आज भी उनसे पूछते हैं कि क्या सीए की परीक्षा पास करने के बाद सचिन को सरकारी नौकरी मिलेगी. सीए पेशे को लेकर गांव में अब भी स्पष्टता नहीं है, लेकिन सचिन की सफलता से चीजें बदल रही हैं.




















