जयपुर. राजस्थान विश्वविद्यालय और उससे जुड़े संघटक कॉलेजों में इन दिनों एडमिशन की प्रक्रिया चल रही है और हजारों स्टूडेंट्स दाखिले के लिए प्रयासरत हैं. लेकिन इस प्रक्रिया के बीच जयपुर के महारानी कॉलेज में एक ऐसा विवाद सामने आया है, जिसने शिक्षा के मंदिर को सामाजिक और धार्मिक बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है. परिसर में बनीं मजारों को लेकर छात्र संगठनों और धार्मिक संगठनों के बीच विरोध तेज हो गया है. अब यह मुद्दा कॉलेज प्रशासन से होते हुए जिला प्रशासन और राजनीतिक गलियारों तक पहुंच चुका है.
दरअसल, राजस्थान का यह पहला महिला कॉलेज है, जहां परिसर में मजार निर्माण को लेकर विवाद खड़ा हुआ है. कॉलेज परिसर की पानी की टंकी और पंप हाउस के पास तीन मजारें बनी हुई हैं, जिनकी जानकारी लंबे समय तक किसी को नहीं थी. लेकिन हाल ही में यह मुद्दा सार्वजनिक हुआ और छात्र संगठनों ने इसे अवैध अतिक्रमण करार देते हुए कॉलेज प्रशासन से इन्हें हटाने की मांग शुरू कर दी. अब छात्रों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों के बीच इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
मजारों को हटाने की मांग को लेकर छात्र संगठनों ने चेताया
लोकल-18 ने कॉलेज का दौरा कर वहां मौजूद छात्राओं से बात की. कई छात्राओं को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी, जबकि कुछ छात्राएं विवाद के कारण बोलने से बचती रहीं. लेकिन एबीवीपी छात्र संगठन के प्रतिनिधियों ने साफ कहा कि मजारों को हटाने की मांग को लेकर वे पहले ही राजस्थान यूनिवर्सिटी की कुलपति, जयपुर कलेक्टर और पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंप चुके हैं. उनका कहना है कि शैक्षणिक संस्थान धार्मिक गतिविधियों से मुक्त होने चाहिए और यदि समय रहते इन मजारों को नहीं हटाया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा.
महिला कॉलेज में धार्मिक निर्माण को लेकर उठे सवाल
महारानी कॉलेज राज्य का एक प्रमुख महिला कॉलेज है, जहां हज़ारों छात्राएं पढ़ाई करती हैं. कॉलेज में बिना परमिशन पुरुषों की एंट्री नहीं होती और सुरक्षा व्यवस्था सख्त रहती है. लेकिन छात्राओं और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अगर परिसर में धार्मिक गतिविधियों को अनुमति दी गई तो आने वाले समय में महिलाओं की सुरक्षा को खतरा हो सकता है. इसी वजह से मजारों को हटाने की मांग ज़ोर पकड़ रही है.
जांच कमेटी करेगी हकीकत का पता
विवाद के तूल पकड़ने के बाद जिला कलेक्टर ने छह सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है. यह कमेटी स्थल का निरीक्षण कर यह जांच करेगी कि मजारें कब और कैसे बनीं, और क्या यह अतिक्रमण है. कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल एडमिशन प्रक्रिया जारी है और कॉलेज खुलने के बाद किसी भी बाहरी व्यक्ति की एंट्री नहीं होगी. लेकिन अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि कॉलेज प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में जाएगा.




















