राजस्थान में इस बार मानसून तय समय से 7 दिन पहले दस्तक देकर पूरे जून में जलवर्षा का ऐसा रिकॉर्ड बना गया, जिसे देखने को सालों बाद मौका मिला है। महज 15 दिन में ही राज्य के कई हिस्सों में पूरे महीने की बारिश का कोटा पूरा हो गया है। नतीजा यह हुआ कि प्रदेश के 692 बांधों में से 21 बांध लबालब भर गए हैं और 95 सूखे पड़े बांधों में भी पानी की आवक दर्ज हुई है।
जून माह में हुई रिकॉर्ड तोड़ बारिश से न केवल दक्षिण-पूर्वी बल्कि पश्चिमी रेगिस्तानी इलाकों में भी अच्छी बरसात हुई है। मौसम विभाग ने जुलाई के शुरुआती दो सप्ताह के लिए भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। कोटा, उदयपुर, अजमेर, जयपुर और भरतपुर संभागों के जिलों में अगले 15 दिनों तक अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है।
औसत से दोगुनी बारिश, 125.3MM पानी बरसा
राजस्थान में 1 जून से 30 जून तक कुल 125.3MM बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य औसत 55MM ही होता है। यानी इस बार जून में सामान्य से 128 फीसदी अधिक बारिश हुई है। इसकी वजह मानसून की दोनों शाखाओं — अरब सागर और बंगाल की खाड़ी — का एकसाथ और लगातार सक्रिय रहना बताया जा रहा है।
बारिश का यह असर जल स्रोतों पर साफ दिखाई दे रहा है। बीसलपुर बांध में पानी की आवक जहां आमतौर पर जुलाई में शुरू होती है, वहां इस बार 16 जून से ही पानी आना शुरू हो गया, जो अब तक जारी है। त्रिवेणी नदी भी जून में ही बहने लगी और चंबल पर बने कोटा बैराज के गेट जून में ही खोलने पड़े।
बारां बना सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला
जून में सबसे ज्यादा बारिश बारां जिले में दर्ज की गई, जहां 390.4MM पानी गिरा। यह जिले की औसत बारिश 101.7MM से 284% ज्यादा है। दूसरे स्थान पर बांसवाड़ा रहा, जहां 274.3MM बारिश हुई। यहां भी औसत 101.2MM से 171% अधिक बारिश दर्ज हुई।
पश्चिमी रेगिस्तानी इलाकों जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर में भी सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। जैसलमेर में 37.7MM, बाड़मेर में 42.9MM, और बीकानेर में 43.5MM पानी बरसा। यह तीनों ही जिलों की औसत बारिश से 2% से लेकर 53% तक ज्यादा है।
21 बांध लबालब, 95 सूखे बांधों में आई जान
राज्य में मानसून के आने से पहले 692 में से केवल 7 बांध फुल थे, जबकि 387 बांध पूरी तरह सूखे पड़े थे। अब 21 बांध महज 15 दिन की बारिश में फुल हो गए हैं। साथ ही 95 ऐसे बांध हैं, जिनमें अब पानी की आवक शुरू हो चुकी है।
ब्यावर स्थित नारायण सागर, बूंदी का रूनिजा, झालावाड़ का सारनखेड़ी और सरोला जैसे कई बांध पहले पूरी तरह सूख चुके थे, लेकिन अब इनका जलस्तर बढ़ चुका है। बारां जिले के गोपालपुरा बांध, अकलेरा सागर, कालीसोट, उम्मेद सागर, बिलास डेम, भीमलत आदि बांधों में भी तेज बारिश के कारण पानी भर गया है।
अगले दो हफ्ते भी रहेंगे बारिश वाले
मौसम केन्द्र जयपुर की रिपोर्ट के अनुसार जुलाई के पहले दो सप्ताहों में प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना है। पहले सप्ताह में कोटा और उदयपुर संभाग प्रभावित रहेंगे, वहीं दूसरे सप्ताह में अजमेर, जयपुर और भरतपुर संभागों में बारिश तेज हो सकती है।
मौसम विभाग ने साफ किया है कि जुलाई महीने में भी औसत से ज्यादा बरसात होने की संभावना है। यह बारिश प्रदेश के जल भंडारण, कृषि और भूजल स्तर के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है।
मानसून की शुरुआती रफ्तार ने इस बार राजस्थान को राहत दी है। न केवल बांधों में पानी आया है, बल्कि खेतों, नदियों और तालाबों की भी सूरत बदली है। यदि जुलाई में भी इसी तरह बारिश होती रही, तो यह साल पानी के लिहाज से प्रदेश के लिए शुभ संकेत लेकर आएगा।




















