भारत के सबसे चर्चित ऑनलाइन सट्टेबाजी रैकेट महादेव बेटिंग ऐप से जुड़ा मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार कार्रवाई हुई है राजस्थान की राजधानी जयपुर में, जहां प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने बुधवार को कूकस स्थित फाइव-स्टार होटल फेयर माउंट में छापेमारी की। बताया जा रहा है कि महादेव ऐप से जुड़े कुछ संदिग्ध लोग यहां एक शादी में शामिल होने के लिए रुके हुए थे।
शादी की आड़ में अपराध!
ईडी सूत्रों के मुताबिक, उन्हें इनपुट मिला था कि महादेव बेटिंग सिंडिकेट से जुड़े कई लोग एक हाई-प्रोफाइल शादी में शामिल होने आए हैं और होटल में रुके हैं। इसी सूचना पर छत्तीसगढ़ रायपुर से आई ईडी की टीम ने दबिश दी और होटल के दो-तीन कमरों में ठहरे संदिग्धों से पूछताछ शुरू की। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई।
ईडी को छापे के दौरान डिजिटल डिवाइसेज, दस्तावेज और कुछ मोबाइल फोन भी बरामद हुए हैं, जिनमें मनी लॉन्ड्रिंग, शेल कंपनियों और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन के पुख्ता सबूत मिलने की बात कही जा रही है।
जयपुर बना मनी लॉन्ड्रिंग का अड्डा?
यह पहली बार नहीं है जब जयपुर महादेव ऐप केस की जद में आया हो। 16 अप्रैल 2025 को भी ईडी ने जयपुर के सोडाला इलाके में एपल रेजिडेंसी में ड्राय फ्रूट व्यापारी भरत दाधीच के घर पर छापा मारा था। तब भी क्रिप्टो और हवाला ट्रांजैक्शन के सुराग मिले थे।
महादेव ऐप केस की छानबीन के दौरान ईडी को जयपुर के कई बड़े व्यापारियों के बैंक खाते संदिग्ध लेनदेन में लिप्त मिले हैं। बताया जा रहा है कि ये खाते सट्टेबाजों के लिए मनी रूटिंग का जरिया बने हुए थे।
करोड़ों की सट्टेबाजी, गेम की लत और डिजिटल फ्रॉड
महादेव बुक ऑनलाइन भारत में अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी का सबसे बड़ा नेटवर्क बन चुका है। क्रिकेट, फुटबॉल, यहां तक कि चुनावों पर भी इससे सट्टा लगवाया जाता है। कंपनी यूजर्स को गेमिंग की लत लगाने के लिए उन्हें पहले पैसे देती थी और फिर मोटी रकम वसूलती थी।
कंपनी के पास लगभग 99 लाख यूजर्स का डेटा है और अकेले कोरोना काल के दौरान 2,000 करोड़ से ज्यादा की सट्टेबाजी इसी प्लेटफॉर्म पर हुई थी। कंपनी ने अपनी वेबसाइट और ऐप के जरिए देशभर में नेटवर्क फैला रखा है।
एक जूस वाले से दुबई तक का सफर
इस पूरे घोटाले के पीछे छत्तीसगढ़ के भिलाई निवासी सौरभ चंद्राकर और उसके साथी रवि उप्पल का दिमाग है। सौरभ एक वक्त में जूस की दुकान चलाता था, जबकि रवि एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था। साल 2019 में दोनों दुबई चले गए और वहीं से महादेव बुक ऑनलाइन की नींव रखी गई।
दुबई से संचालित इस ऐप के जरिए सौरभ और रवि ने करोड़ों की काली कमाई की। उन्होंने सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग के जरिए ऐप को प्रमोट किया और सट्टेबाजी के दूसरे ऐप्स को खरीदकर महादेव नेटवर्क में मिला लिया।
बड़े-बड़े नाम जांच के दायरे में
ईडी की जांच में अब तक फिल्मी सितारे, इन्फ्लुएंसर, और बड़े व्यापारी शामिल हो चुके हैं। ईडी के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए हवाला, फर्जी बैंक अकाउंट, क्रिप्टो वॉलेट और शेल कंपनियों का जाल बिछाया गया था, जिससे काले धन को सफेद किया जाता था।
क्राइम का क्लाइमेक्स?
महादेव ऐप केस सिर्फ एक सट्टेबाजी घोटाला नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध सिंडिकेट का हिस्सा है, जिसमें तकनीक, सोशल मीडिया, फर्जी पहचान और इंटरनेशनल फाइनेंशियल नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। जयपुर की यह ताजा कार्रवाई इस केस की जड़ें और गहरी करती है, और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
ED की टीम अब जयपुर, कोलकाता, दिल्ली, भोपाल और छत्तीसगढ़ के कई ठिकानों पर नज़र बनाए हुए है। आने वाले समय में इस मामले से जुड़ी कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।




















