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बिहार के लोगों के अधिकारों पर डाका…, वोटर लिस्ट की जांच पर कांग्रेस का विरोध, चुनाव आयोग पर साधा निशाना

कांग्रेस ने गुरुवार को बिहार में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण का विरोध किया. कांग्रेस ने कहा कि बिहार के लोगों के अधिकारों पर डाका डाला जा रहा है. बिहार में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले साजिशन मतदाताओं का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) किया जा रहा है. इसमें घर-घर जाकर वोटरों को सत्यापित किया जाएगा और उनसे उनकी नागरिकता साबित करने को कहा जाएगा.

नागरिकता कैसे साबित करनी होगी?

  • 1 जुलाई 1987 से पहले जन्मे लोगों के लिए- उन्हें अपनी जन्म तिथि या स्थान की सत्यता स्थापित करने के लिए कोई एक वैध दस्तावेज देना होगा.
  • 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्म हुआ है तो- उन्हें अपने साथ-साथ अपने माता-पिता में से किसी एक का वैध दस्तावेज भी देना होगा.
  • 2 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे मतदाताओं के लिए- इनको अपना और अपने माता-पिता के वैध दस्तावेज देने होंगे.

वोटर लिस्ट की जांच पर सवाल

  • आखिर ये अब क्यों किया जा रहा है?
  • इस पूरी प्रक्रिया को, मानसून के दिनों में बिहार के बाढ़-प्रभावित इलाकों में, एक महीने में कैसे पूरा किया जाएगा?
  • लोकसभा चुनाव के वक्त जब इसी वोटर लिस्ट पर वोट पड़े हैं, तो विधानसभा में क्यों नहीं?
  • साफ है, जब भी BJP पर संकट आता है, वो चुनाव आयोग की तरफ भागते हैं. चुनाव आयोग मोदी जी के तीन बंदर हैं. न सच सुनते हैं, न सच देखते हैं, न सच बोलते हैं.

इंडिया गठबंधन के नेताओं ने किया विरोध

बिहार में विपक्षी गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलेपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (इंडिया) ने राज्य विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची में गहन पुनरीक्षण के प्रस्ताव का शुक्रवार को कड़ा विरोध किया. उन्होंने इस कवायद को आगामी राज्य विधानसभा चुनावों में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की मदद करने के लिए एक षड्यंत्र करार दिया.

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यहां संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा और भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य सहित अन्य नेताओं ने कहा कि बिहार में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण का विरोध किया जाएगा. गठबंधन ने कहा कि वह निर्वाचन आयोग के पास एक प्रतिनिधिमंडल भेजेगा और यदि वे हमें संतुष्ट करने में असफल रहे तो आगे की कार्रवाई की जाएगी.

तेजस्वी यादव ने उठाया सवाल

तेजस्वी यादव ने कहा कि यदि निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया को लेकर इतना गंभीर था, तो उसने पिछले वर्ष के लोकसभा चुनावों के तुरंत बाद ऐसा क्यों नहीं किया? उसने इस हफ्ते के आरंभ तक इंतजार क्यों किया? उन्होंने दावा किया, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हाल ही में दिल्ली गए थे, जाहिर तौर पर वह विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी जेडीयू की संभावनाओं के बारे में गठबंधन सहयोगियों के साथ अपनी आशंकाओं को साझा करने के लिए गए थे. हमें संदेह है कि बाद में सत्तारूढ़ गठबंधन ने निर्वाचन आयोग को कुछ ऐसा करने का निर्देश दिया, जिससे चुनावों में उसे मदद मिल सके.

पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि हमें संदेह है कि इस कवायद का उद्देश्य, जिसमें मतदाताओं से ऐसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं जो बहुत कम लोगों के पास हो सकते हैं, बड़ी संख्या में लोगों को मताधिकार से वंचित करना है, विशेष रूप से दलित, मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग जैसे वंचित वर्गों को.

बीजेपी-आरएसएस की जनविरोधी सोच

उन्होंने आरोप लगाया कि एक बार जब नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे, तो अगला कदम इन लोगों को सामाजिक कल्याण योजनाओं के लाभ से वंचित करना हो सकता है. यह बीजेपी-आरएसएस की जनविरोधी सोच के अनुरूप है, जिसे दत्तात्रेय होसबाले ने संविधान की प्रस्तावना से समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द हटाने की वकालत करके अभिव्यक्त किया है. तेजस्वी ने कहा कि निर्वाचन आयोग के लिए सिर्फ 25 दिनों में इतनी बड़ी कवायद करना असंभव है, जैसा कि उसने प्रस्तावित किया है. अगर वास्तव में यह संभव है, तो मैं केंद्र को चुनौती देता हूं कि वह दो महीने के भीतर जाति जनगणना कराए.

निर्वाचन आयोग पर साधा निशाना

पवन खेड़ा ने कहा कि महात्मा गांधी के तीन बंदरों ने कुछ भी बुरा न देखा, न सुना और न कहा. इसी प्रकार निर्वाचन आयोग कुछ भी सच न देखता है, न सुनता है और न बोलता है. जब हमारे नेता राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव कराने के तरीके पर संदेह जताया, तो बीजेपी की ओर से इसका खंडन आया. यह रिश्ता क्या कहलाता है?

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल के जनमत सर्वेक्षणों से परेशान हैं, जिनमें दिखाया गया है कि बिहार में एनडीए का प्रदर्शन खराब रहने वाला है. इसलिए, उन्होंने शायद निर्वाचन आयोग का इस्तेमाल मास्टरस्ट्रोक के रूप में किया है. कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि निर्वाचन आयोग के लिए बिहार एक प्रयोगशाला है और देश में अन्य जगहों पर भी इसी तरह के प्रयोग हो सकते हैं.

निर्वाचन आयोग को लिखा पत्र

एक दिन पहले निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर अपना विरोध जताने वाले भट्टाचार्य ने दावा किया कि प्रस्तावित कवायद तार्किक रूप से बेतुकी है और यह एक दुःस्वप्न साबित होगा क्योंकि यह कवायद मानसून के दौरान की जा रही है जबकि इस दौरान राज्य के बड़े हिस्से बाढ़ से प्रभावित होते हैं.

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