जयपुर. राजस्थान की राजनीति में बीते दो दिनों से जबर्दस्त हलचल हो रही है. पूर्व सीएम और कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने सीएम भजनलाल शर्मा को हटाने की साजिश वाला बयान देकर चाय के प्याले में तूफान ला दिया है. आपातकाल के 50 साल पूरे होने के मौके पर गहलोत की ओर से जोधपुर में दिए गए इस बयान का बीजेपी ने एकस्वर में खंडन किया है. बीजेपी नेताओं का कहना है कि गहलोत का पिछला कार्यकाल उनकी पार्टी की साजिशों का शिकार रहा है. लिहाजा अब उन्हें सपने भी ऐसे ही आते हैं. वो अपना फ्रेस्टेशन निकालने के लिए उल-जुलूल बयान देते रहे हैं.
बीजेपी के कद्दावर नेता राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि गहलोत की ओर से बीजेपी सरकार को लेकर दिया गया बयान बेबुनियाद, तर्कहीन और भ्रामक है. गहलोत को शायद अपने ही कार्यकाल की यादें ताजा हो रही हैं जब उनकी सरकार एक वर्ष भी पूरे नहीं कर पाई थी और दो खेमों में बंट गई थी. उस समय सरकार के मंत्री-विधायक 34 दिनों तक एक पांच सितारा होटल में कैद रहे. यहां तक की गहलोत ने अपने सहयोगियों को ‘निकम्मा और नकारा’ कहकर अपमानित भी किया. गहलोत सस्ती लोकप्रियता और मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के लिए निराधार आरोप लगाकर राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं.
कांग्रेस सरकार में 5 साल तक नूरा कुश्ती चली थी
जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने कहा कि कांग्रेस सरकार में 5 साल तक नूरा कुश्ती चली. गहलोत और पायलट एक-दूसरे को हटाने के षड्यंत्र रचते रहे. कांग्रेस शासन में राजस्थान विकास से भटक गया और गर्त में चला गया था. अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में चहुंमुखी विकास हो रहा है. कांग्रेस को ये विकास रास नहीं आ रहा है. इसलिए वह भटकाव की राजनीति कर रही है. हमारी सरकार जनसेवा और विकास के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है. जनता गुमराह नहीं होगी. वह सच और विकास के साथ खड़ी है.
यह गहलोत का व्यक्तिगत दर्द है, जिसे वे अब दूसरों पर थोप रहे हैं
राज्यसभा सांसद धनश्याम तिवाड़ी बोले कि अशोक गहलोत को ऐसा लगता है कि उनके पूरे कार्यकाल में उनके खिलाफ साजिशें रची गईं. इसलिए अब वे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लेकर भी साजिश की आशंका जता रहे हैं. गहलोत को पांच वर्षों तक ऐसा महसूस होता रहा कि राज्य और केंद्र दोनों ही उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं. शायद यही वजह है कि अब वे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लेकर भी वैसी ही आशंका जाहिर कर रहे हैं. यह उनका व्यक्तिगत दर्द है, जिसे वे अब दूसरों पर थोप रहे हैं.
कांग्रेस विधायक किस तरह से ‘फरार’ हो गए थे पूरा देश जानता है
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने कहा कि अशोक गहलोत और कांग्रेस को पहले अपनी पार्टी की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए ना कि भारतीय जनता पार्टी के आंतरिक मामलों में अनावश्यक दखल. गहलोत और कांग्रेसी तो अपनी पार्टी तक नहीं संभाल पा रहे हैं. खुद गहलोत और सचिन पायलट के बीच जो जूतम पैजार हुई, वह किसी से छिपी नहीं है. कांग्रेस विधायक किस तरह से ‘फरार’ हो गए थे, यह पूरा देश जानता है. सीएम भजनलाल शर्मा को हटाने को लेकर षड्यंत्र जैसी बात करना निराधार और भ्रामक है. उन्होंने गहलोत के बयान को ‘राजनीतिक भ्रम फैलाने की कोशिश’ बताया है.
यह बयान गहलोत के खालीपन और राजनीतिक हताशा का संकेत है
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री कालीचरण सराफ ने कहा कि अशोक गहलोत की बयानबाजी उनके खालीपन और राजनीतिक हताशा का संकेत है. अशोक गहलोत के पास अब कोई ठोस कामकाज नहीं बचा है. इसलिए वे अनावश्यक बयान दे रहे हैं. यह कांग्रेस की पुरानी संस्कृति रही है कि अपने ही नेताओं को अपमानित किया जाए. सराफ ने कहा कि भाजपा में व्यक्ति की योग्यता और कार्यक्षमता को प्राथमिकता दी जाती है. हमारे यहां पद व्यक्ति की मेहनत और क्षमता के आधार पर दिए जाते हैं न कि चापलूसी या गुटबाजी के बल पर.




















