अजमेर : ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में संकट मोचन महादेव का प्राचीन मंदिर होने के दावे के मामले में अजमेर की सिविल कोर्ट प्रथम ने वाद में पक्षकार के 7/10 के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने पूर्व में हुई सनवाई के दौरान आदेश को सुरक्षित रखा था. शनिवार को कोर्ट ने सुरक्षित आदेश को सुनाया. वहीं, कोर्ट में अब पक्षकार दरगाह कमेटी की ओर से पूर्व में लगाए गए प्रार्थना पत्र को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस होगी. परिवादी हिंदू राष्ट्र सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता भी स्थानीय वकील के अलावा हाईकोर्ट से आए वकील के साथ कोर्ट में पेश हुए.
अजमेर ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह बनाम संकट मोचन महादेव मंदिर मामले में कोर्ट में चल रहे वाद में पक्षकार भारतीय पुरातत्व विभाग और केंद्रीय अल्पसंख्यक विभाग को झटका लगा है. बता दें कि इस वाद में दोनों विभाग समेत दरगाह कमेटी पक्षकार हैं. कोर्ट ने तीनों पक्षकारों को नोटिस भेजे थे. इसके बाद भारतीय पुरातत्व विभाग और केंद्रीय अल्पसंख्यक विभाग ने 7/10 अर्जी दी थी, जिसमें वाद में भारत सरकार को पक्षकार नहीं बनाने का हवाला दिया था. कोर्ट ने मामले में दोनों पक्षों को सुना और पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान आदेश को सुरक्षित रखा था. शनिवार को अजमेर पश्चिम की सिविल कोर्ट प्रथम ने आदेश सुनाया.
परिवादी पक्ष के वकील संदीप कुमार ने बताया कि कोर्ट में दरगाह कमेटी 7/11 की ओर से पूर्व में लगाए गए प्रार्थना पत्र पर सुनवाई होनी है. इसके अलावा विगत 30 जुलाई को 7/10 पर बहस हुई थी. भारतीय पुरातत्व विभाग और केंद्रीय अल्पसंख्यक विभाग की ओर से पूर्व में लगाए गए प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए आदेश सुरक्षित रखा था. दोनों विभागों की ओर से दलील थी कि 79 और 80 के नियम के अंतर्गत वाद चलने योग्य नहीं है. 7/10 का प्रार्थना पत्र खारिज हो चुका है. दरगाह कमेटी ने उसकी ही पुनरावृत्ति करते हुए 7/11 की अर्जी कोर्ट में लगाई थी. लिहाजा 79 और 80 के नियम पर तर्क करने की आवश्यकता परिवादी पक्ष को नहीं है. शेष तर्क था कि दरगाह में वरशिप एक्ट लागू है, ऐसे में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता. दूसरा उन्हें नोटिस नहीं दिया गया. तीसरा दरगाह में शिवलिंग कहां है, उसकी लोकेशन और शिवलिंग का क्षेत्र व लंबाई, चौड़ाई और खसरा नंबर नहीं दिया गया है. इसको लेकर ही परिवादी पक्ष की ओर से न्यायालय में उत्तर पेश करने हैं. परिवादी पक्ष की ओर से दरगाह कमेटी के प्रार्थना पत्र 7/11 को खारिज करने की मांग कोर्ट से की जाएगी.
दुनिया के सामने सच जल्द आएगा : परिवादी विष्णु गुप्ता ने बताया कि शनिवार को कोर्ट में सुनवाई हुई. भारतीय पुरातत्व विभाग और केंद्रीय अल्पसंख्यक विभाग की ओर से नियम 7/10 का प्रार्थना पत्र पूर्व में पेश किया गया था, जिसको कोर्ट ने खारिज कर दिया है. नियम 7/11 के तहत दरगाह कमेटी ने पूर्व में कोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश किया था, इसको लेकर परिवादी पक्ष की ओर से कोर्ट में उत्तर पेश किया जाएगा.




















