कोटा: हाड़ौती संभाग में जल संसाधन विभाग (WRD) ने नदियों को लिंक करने और बरसात के पानी के बेहतर उपयोग के लिए 11 बड़ी योजनाओं पर काम शुरू किया है. इन योजनाओं की फिजिबिलिटी जांच की जा रही है, ताकि असिंचित 1 लाख हेक्टेयर एरिया में सिंचाई की जा सके. कोटा, बारां और झालावाड़ जिलों में यह अध्ययन कार्य दो सरकारी कंपनियां वाप्कोस और नैबकॉन्स के जरिए करवाया जा रहा है.
नदियों का इंटरलिंक और रिजर्वॉयर पर काम: हाड़ौती क्षेत्र में हर साल अच्छी बारिश होती है और यहां का पानी नदियों व नालों के जरिए कई वॉटर रिजर्वॉयर में पहुंचता है, लेकिन बड़ी मात्रा में पानी बहकर भी निकल जाता है. इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग ने न केवल पानी का स्टोरेज बढ़ाने बल्कि नदियों को इंटरलिंक करने की योजना बनाई है. इस योजना में वर्तमान रिजर्वॉयर की क्षमता बढ़ाने और नए रिजर्वॉयर निर्माण की संभावनाएं भी देखी जा रही हैं, जिनकी स्टोरेज क्षमता 5 से 65 मिलियन क्यूबिक मीटर तक हो सकती है. इन योजनाओं से न सिर्फ सिंचाई सुविधा में विस्तार होगा बल्कि कुछ क्षेत्रों में बाढ़ से राहत भी मिलेगी. सर्वे का उद्देश्य फ्लड मैनेजमेंट को भी मजबूत करना है.
कोटा, बारां और झालावाड़ में चल रहे प्रमुख सर्वे:
- काली सिंध नदी पर बैराज: कोटा जिले के हरिपुरा मांझी के पास काली सिंध नदी पर बैराज निर्माण की फिजिबिलिटी जांच की जा रही है. इस परियोजना से पंप हाउस के जरिए लिफ्ट सिस्टम द्वारा आंवा और मंडाना क्षेत्र के 10,000 हेक्टेयर में सिंचाई संभव होगी.
- आलनिया डैम और डायवर्जन चैनल: आलनिया डैम की क्षमता बढ़ाने और रानपुर डैम से डायवर्जन चैनल द्वारा पानी लाने की योजना है. इसमें बंदा धरमपुरा के कैचमेंट एरिया की स्टडी भी शामिल है. यह योजना 6,500 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचित कर सकती है.
- शाहबाद क्षेत्र में बाणगंगा नदी से सिंचाई: केलवाड़ा समरानिया क्षेत्र में बाणगंगा नदी और बिलास डैम से 15,000 हेक्टेयर क्षेत्र को लिफ्ट इरिगेशन सिस्टम से सिंचित करने का सर्वे हो रहा है.
- झालावाड़ जिले में आहू नदी पर आर्टिफिशियल रिजर्वॉयर: पिड़ावा तहसील के गागरिन बांध से पानी लिफ्ट कर सिंचाई के लिए उपयोग करने की योजना बनाई जा रही है.
- चंवली डैम की अपस्ट्रीम स्टडी: झालावाड़ के धनोरिया, सारोनिया और ओड़ियाखेती गांवों सहित आसपास के क्षेत्रों में 4,000 हेक्टेयर में सिंचाई के लिए चंवली डैम की अपस्ट्रीम स्टडी होगी.
- सांगोद विधानसभा में रिजर्वॉयर निर्माण: कोटा जिले के सांगोद क्षेत्र में किशोरपुरा और खोरियाखेड़ी गांवों के पास रिजर्वॉयर बनाने का सर्वे किया जाएगा. अरु नदी और उसके कैचमेंट का पानी इसमें स्टोर कर 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचित किया जा सकता है.
- आहू नदी पर दो बैराज: झालावाड़ जिले में आहू नदी पर दो बैराज और लिफ्ट इरिगेशन सिस्टम से 15,000 हेक्टेयर एरिया को सिंचाई के लिए जोड़ा जा रहा है.
- चंबल और छोटी काली सिंध पर योजना: इन दोनों नदियों से लिफ्ट इरिगेशन सिस्टम के जरिए 6,000 हेक्टेयर एरिया को सिंचित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं.
- पंचपहाड़ में आहू और पीपलाद नदी का इंटरलिंक: झालावाड़ के पंचपहाड़ तहसील में आहू और पीपलाद नदियों को जोड़ने की योजना का सर्वे किया जाएगा.
- छपरा में पार्वती-बैथली नदी का कनेक्शन: बारां जिले के छपरा इलाके में पार्वती और बैथली नदियों को जोड़ने की संभावना तलाशी जा रही है. बैथली डैम की क्षमता बढ़ाने के साथ, टनल या फीडर कैनाल के जरिए 15,000 से 17,000 हेक्टेयर एरिया में सिंचाई संभव हो सकेगी.
- परवन प्रोजेक्ट फेस-2 और महलपुर बैराज: परवन प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में शेष बारां क्षेत्र को सिंचित करने की योजना है. इसके साथ ही पार्वती नदी पर ERCP के तहत बनने वाले महलपुर बैराज से झालावाड़ और बारां के 22,700 हेक्टेयर एरिया को सिंचाई सुविधा मिल सकेगी.
सर्वे व फिजिबिलिटी रिपोर्ट बनवाने की मिली स्वीकृति: डब्ल्यूआरडी के चीफ इंजीनियर डीआर मीणा के अनुसार, “साल 2024-25 में दो योजनाओं के सर्वे व फिजिबिलिटी रिपोर्ट बनवाने की प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति मिल गई थी, जिन पर कोटेशन के आधार पर वर्क ऑर्डर जारी किए गए. इसी तरह वर्ष 2025-26 में 6 डिविजनों के आधार पर 9 कार्यों के सर्वे व फिजिबिलिटी रिपोर्ट बनवाई जानी है. इसकी प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति सरकार से मिल चुकी है. अब इनकी शर्तें तैयार की जा रही हैं, ताकि कोटेशन के आधार पर वर्क ऑर्डर दिए जा सकें.” उन्होंने बताया कि सभी कार्य वाप्कोस, नैबकॉन्स जैसी सरकारी एजेंसियों के माध्यम से कराए जाएंगे, जो प्रीसाइज सर्वे कर फिजिबिलिटी जांचने के बाद डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करेंगी. इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर सरकार आगे निर्णय लेगी.




















