बीकानेर: बीकानेर में इन दिनों आम आदमी की थाली से हरी सब्जियां पूरी तरह से गायब हो गई हैं. मानसून के दौर में बाजार से हरी सब्जियां आम आदमी की पहुंच से बाहर होती नजर आ रही हैं. सब्जी में स्वाद के लिए उपयोग में आने वाला धनिया और शिमला मिर्च 200 से ढाई सौ रुपए किलो बिक रहा है. लौकी, भिंडी, टमाटर और तरकारी 80 से 100 रुपए किलो के भाव से बिक रही हैं. वहीं, दूसरी हरी सब्जियां जैसे खीरा भी 60 से 80 रुपए किलो के भाव से बिक रहा है. बाजार में केवल आलू 20 से 30 रुपए किलो के भाव से क्वालिटी के अनुसार मिल रहा है.
बीकानेर में सब्जी का कारोबार करने वाले दुकानदार भी सब्जियों के बढ़ते दामों के चलते बिक्री न होने से परेशान हैं. दुकानदार रवि और राजू कहते हैं कि बारिश के कारण सब्जियों के दामों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है.
सब्जी खरीदने आए युवक ओम कहते हैं कि बाजार में हरी सब्जियां इतनी महंगी हो गई हैं कि दो-तीन दिन के अंतराल से एक बार सब्जी खरीदने आते हैं. बाजार में दुकानों पर हरी सब्जी खरीदने वाले ग्राहक पूरी तरह से गायब हो गए हैं. वह कहते हैं कि अब घरों में देसी सब्जियां जैसे दाल, पापड़, मूंगोड़ी की सब्जी विकल्प के रूप में बनाई जा रही हैं.
गृहिणी महंगाई से परेशान: सब्जी खरीदने आई गृहणी मंजू गहलोत कहती हैं कि सब्जियों में इतनी महंगाई हो गई है कि सब्जी लेने आते हैं, लेकिन कुछ समझ में नहीं आता. आलू के अलावा हर सब्जी दो से तीन गुना भाव में बिक रही है.
सावन में भी महंगी: दरअसल, आमतौर पर माना जाता है कि सावन में हरी सब्जियां नहीं खानी चाहिए और इसलिए कई लोग इन्हें खाने से परहेज करते हैं. बावजूद इसके हरी सब्जियों का महंगा होना लोगों के लिए आश्चर्य की बात है.




















