बीकानेर: हिंदू धर्म शास्त्रों में अमावस्या के दिन का अपना एक विशेष महत्व है. वैसे तो हर महीने कृष्ण पक्ष की आखिरी तिथि को अमावस्या होती है. सावन मास की अमावस्या तिथि हरियाली अमावस्या के नाम से जानते हैं. हिंदू धर्म शास्त्रों में हर तिथि दिन का अपना एक पूजन विधान है. अपने पूर्वजों के निमित्त पूजा अर्चना और पितृ शांति के लिए अमावस्या तिथि को पितरों की पूजा करना चाहिए. इस दिन हवन तर्पण करना करना श्रेष्ठ माना जाता है.
पितृ कार्य के लिए श्रेष्ठ : बीकानेर के पंडित आनंद पारीक ने बताया कि पितृ कार्य तिथि के रूप में अमावस्या तिथि का एक महत्व है. अमावस्या तिथि को अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण पूजन हवन करना श्रेष्ठ माना जाता है. सावन मास की अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है. हरियाली अमावस्या के दिन पौधारोपण खासतौर से पीपल के वृक्ष का रोपण करना चाहिए. इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करना शुभ फलदायी होता है.
- हरियाली अमावस्या का दिन भगवान शिव और पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें. इसके बाद घर के मंदिर या किसी शिवालय में जाकर भगवान शिव, माता पार्वती और पितरों की विधिवत पूजा करें.
- शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भस्म, अक्षत और पुष्प चढ़ाएं. “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें और शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ करें. माता पार्वती को हल्दी, चूड़ियां, सिन्दूर और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें.
- पितृ पूजन के लिए जल में काले तिल, कुश और फूल मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करें. पिंडदान कर पितरों का स्मरण करें और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें. इस अवसर पर जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा दान करना अत्यंत पुण्यदायी होता है.
- साथ ही, पीपल और तुलसी के पौधे की पूजा करें. पीपल को जल चढ़ाएं, दीपक लगाएं और सात परिक्रमा करें. हरियाली अमावस्या पर की गई यह पूजा पितृदोष निवारण के साथ घर में सुख-शांति और समृद्धि भी प्रदान करती है.
ये करें काम : हर अमावस्या के दिन श्रीमद्भगवद्गीता का सातवां अध्याय पढ़कर उस पाठ का पुण्य अपने पितरों को अर्पण करें. सूर्य को अर्घ्य दें और प्रार्थना करें. इससे पितरों का आर्शीवाद मिलता है और घर में सुख-सम्पत्ति बढ़ती है.
हरियाली अमावस्या 2025: प्रमुख लाभ
- पितृ दोष निवारण
- भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा
- सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति
- संतान सुख व जीवन में सकारात्मक ऊर्जा




















