कोटा : दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे 52 का ट्रैफिक दरा की नाल में से निकल रहा है. यहां पर यह पूरा ट्रैफिक एक लेन की रेलवे अंडरपास के नीचे से निकलता है. इसके चलते यातायात जाम जैसे हालात दरा घाटी में हो जाते हैं और कई किलोमीटर लंबा जाम भी यहां लग चुका है. यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है, क्योंकि एक्सप्रेसवे का ट्रैफिक भी बढ़ रहा है.
दूसरी तरफ यह रास्ता भी काफी पुराना था. ऐसे में जिला प्रशासन ने इसकी सुरक्षा ऑडिट करवाई थी, जिसमें सार्वजनिक निर्माण विभाग ने ऑडिट की और यह खरी नहीं उतरी है. इसके तत्काल बाद ही दरा घाटी से भारी यातायात के निकलने पर रोक लगा दी गई है. इन सभी वाहनों को झालावाड़, खानपुर होकर डायवर्ट किया जा रहा है. वहीं, कोटा वाले ट्रैफिक को भी बारां से झालावाड़ की तरफ भेजा जा रहा है. इस ट्रैफिक में दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे 52 का हैवी ट्रैफिक भी शामिल है.
कोटा ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर ने बताया कि मोडक व थाना कनवास क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 52 दरा स्टेशन से कमलपुरा के बीच में करीब 10 किलोमीटर का एरिया है, जिसमें सड़क संकरी है. यहीं बीच-बीच में उतार-चढ़ाव है. रोड में काफी मोड़ हैं व रेलवे पुलिया के नीचे से एक ही वाहन निकलने का रास्ता है. राष्ट्रीय राजमार्ग होने से भारी वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है. वर्तमान में 8 लेन रोड दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे का कार्य निर्माणाधीन है. स्थानीय वाहन व अन्य राज्यों से आने-जाने वाले भारी वाहनों का काफी दबाव रहता है. इस रास्ते में भारी लोडिंग वाहन अचानक खराब या वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने सेफ्टी ऑडिट करवाई गई थी.
इसकी ऑडिट की रिपोर्ट के आधार पर सुझाव दिया गया है कि यह संरचना बहुत पुरानी है और भारी यातायात के लिए उपयुक्त नहीं है. इस पर भारी वाहन नहीं चलाएं जाएं. भारी वाहनों के गुजरने से ट्रैफिक व्यवस्था बिगड़ जाती है, इसीलिए आने वाले समय तक इस ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया है. भारी वाहन दरा जंगल न आकर खानपुर, झालावाड़ से वाया बपावरकलां, सांगोद होते से कोटा आएंगे. इसके अलावा भारी वाहन झालावाड़ से कोटा आने वाले वाया सुकेत, रामगंजमण्डी, चेचट, रावतभाटा होते हुए भी कोटा आ सकते हैं. कोटा से झालावाड़ जाने वाले भारी वाहनों के लिए कोटा से बारां, बपावरकलां खानुपर होते हुए झालावाड़ जा सकते हैं.




















