जयपुर. श्रावण मास के तीसरे सोमवार को प्रदेशभर में शिवभक्ति का अद्भुत उत्साह देखने को मिला. तड़के से ही शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. महिलाएं, पुरुष, युवा और बुजुर्ग सभी भक्ति भाव से भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना में लीन नजर आए. मंदिरों में ॐ नमः शिवाय और हर-हर महादेव के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो गया. सावन सोमवार के मौके पर श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से जलाभिषेक कर भगवान से शांति, सुख और समृद्धि की कामना की. कई भक्त व्रत रखकर और रुद्राभिषेक कर भोलेनाथ को प्रसन्न करने में जुटे दिखे. मंदिरों के बाहर लंबी कतारें लगी रहीं, जिनमें भक्त संयम और श्रद्धा के साथ अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे.
झारखंड महादेव मंदिर में लंबी कतार : जयपुर समेत प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में ताड़केश्वर महादेव, झारखंड महादेव, चमत्कारेश्वर महादेव और रोजगारेश्वर महादेव मंदिरों में विशेष पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया. इन मंदिरों में आज श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली. कई स्थानों पर मंदिर समितियों की ओर से भंडारे और प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी की गई. जयपुर के एकमात्र द्राविड़ सभ्यता के प्रतीक झारखंड महादेव मंदिर में भक्तों का सैलाब नजर आया. देर रात बाद यहां श्रद्धालु लाइन में खड़े हो गए, आलम यह रहा कि शिव भक्तों की कतार 1 किलोमीटर से भी लंबी हो गई. इसके बाद आराध्य भोलेनाथ के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं को 2 से 3 घंटे का इंतजार करना पड़ा. इस विशेष दिन को लेकर स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन समितियों ने भी व्यापक तैयारियां की थीं. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, मेडिकल और विश्राम स्थल जैसी व्यवस्थाएं भी उपलब्ध कराई गई.
कांवड़ यात्रा भी रही आकर्षण का केंद्र : सावन के तीसरे सोमवार को शिवभक्ति के साथ-साथ कांवड़ यात्रा का भी उत्साह चरम पर रहा. विभिन्न जिलों और गांवों से कांवड़ लेकर श्रद्धालु नदियों से जल भरकर शिवालयों की ओर बढ़ते नजर आए. इन यात्राओं में युवा वर्ग की भागीदारी विशेष रही, जो ‘बोल बम’ के नारों के साथ कांवड़ उठाए हुए धार्मिक उल्लास में डूबे थे. जयपुर के तीर्थ गलता जी कुंड पर देर रात स्नान के बाद कावड़िया जल लेकर शिव मंदिरों की ओर रुख करते हुए नजर आए. बड़ी संख्या में इस दौरान शिव भक्त कावड़ लेकर रवाना हुए. गलता तीर्थ पर भी इस मौके पर मेले का माहौल नजर आया.
विनायक चतुर्थी का संयोग : सावन की विनायक चतुर्थी 28 जुलाई को आई है, इस दिन सावन का तीसरा सोमवार भी है. यह दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना के लिए समर्पित है. ऐसी मान्यता है कि आज के दिन गणेश जी को सिंदूर, और दूर्वा अर्पित कर के पूजा करनी चाहिए. जिससे मनोकामना पूरी होती है. जिन भक्तों को नौकरी और व्यवसाय में बाधाएं आ रही हों, तो इस दिन गणेश मंदिर में जा कर सिंदूर अर्पित करना चाहिए.




















