जयपुर: संसद के मानसून सत्र से पहले रविवार को आयोजित सर्वदलीय बैठक में नागौर सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने भाग लिया. बैठक के दौरान उन्होंने कई जनहित से जुड़े मुद्दों को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया और केंद्र से ठोस कदम उठाने की मांग की.
पेपर लीक पर व्यापक चर्चा की मांग: हनुमान बेनीवाल ने बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा चुनाव से पहले किए गए वादों का हवाला देते हुए कहा कि देशभर में पेपर लीक माफियाओं से मेहनतकश युवा आहत हैं. राजस्थान की एसआई भर्ती को रद्द किया गया है और RPSC जैसे संस्थानों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं. उन्होंने संसद में पेपर लीक मुद्दे पर विशेष चर्चा कराने की जोरदार मांग की.
सांसद निधि बढ़ाने और छोटे दलों को आवाज देने की मांग: बेनीवाल ने केंद्र सरकार से सांसद निधि (MP LAD) को 5 करोड़ से बढ़ाकर 25 करोड़ रुपए करने की मांग की. साथ ही कहा कि एक या दो सांसदों वाली पार्टियों को भी संसद में प्रत्येक विधेयक पर बोलने का मौका और बीएसी जैसी प्रमुख समितियों में सदस्यता दी जाए. उन्होंने केंद्रीय विद्यालयों में सांसदों का कोटा पुनः बहाल करने की भी मांग रखी.
बेनीवाल ने मानसून के दौरान हर साल होने वाली अतिवृष्टि और बाढ़ की स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन को आधुनिक बनाया जाए. उन्होंने सुझाव दिया कि बाढ़ के पानी को संरक्षित कर स्थानीय क्षेत्रों में उपयोग में लाने की नीति तैयार होनी चाहिए. उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को निरस्त करने के बाद, सिंधु और चिनाब नदी के पानी को राजस्थान, विशेषकर पश्चिमी राजस्थान में लाने की मांग की.
प्रश्नों के जवाब समय पर देने की व्यवस्था की मांग: सांसद ने यह भी कहा कि शून्यकाल और नियम 377 के तहत जो भी विषय सदन में उठाए जाते हैं, उनका जवाब एक सप्ताह के भीतर संबंधित मंत्रालय से सांसद को लिखित रूप में दिया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि शून्यकाल में उठाए गए किसी भी विषय पर संबंधित मंत्री को तत्काल जवाब देने की व्यवस्था की जाए. बेनीवाल ने देश के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की बदहाल स्थिति, संसाधनों की कमी और स्टाफ की भारी कमी पर संसद में विशेष चर्चा कराने की मांग की.
इसके अलावा हाल ही में अहमदाबाद में हुए विमान हादसे का जिक्र करते हुए उन्होंने एविएशन सेक्टर की सुरक्षा, तकनीकी खामियों और DGCA की रिपोर्ट्स पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि इस विषय पर संसद में एक दिन की विशेष चर्चा करवाई जाए. उन्होंने देश में आपदा प्रबंधन के तहत मृतकों और पशुधन के नुकसान पर मिलने वाली आर्थिक सहायता को अपर्याप्त बताते हुए इसमें वृद्धि और समग्र नीति बदलाव की आवश्यकता जताई.




















