बीकानेर: सावन का मास चल रहा है और सावन मास में भगवान शिव की पूजा आराधना के लिए शिवालय से लेकर घरों तक शिव भक्त भक्ति भाव में डूबे हैं. सावन के महीने में भगवान शंकर की पूजा की जाती है और देखने में आता है कि भगवान शिव को लोग बिल्व पत्र अर्पित करते हैं. भगवान शिव को प्रसन्न करने नित्य बिल्वपत्र चढ़ाना चाहिए. भगवान शिव को बिल्य पत्र बेहद प्रिय है. बिल्व वृक्ष संपन्नता का प्रतीक, बहुत पवित्र तथा सुख सम्पत्ति देने वाला है.
बिल्व पत्र की पूजा श्रेष्ठ : पंचांगकर्ता पंडित राजेंद्र किराडू कहते हैं कि शास्त्रों के अनुसार शिवपूजा में बिल्व पत्र का अत्यधिक महत्व है. यह भगवान शंकर का अत्यन्त प्रिय है. कहा जाता है कि तीनों लोक में जितने पुण्य तीर्थ प्रसिद्ध है वे सम्पूर्ण तीर्थ बिल्व वृक्ष के मूल भाग में निवास करते है.
त्रिदेवों का वास : किराडू कहते है कि शिव पुराण के अनुसार बिल्व वृक्ष महादेव का ही स्वरूप है. ऋक्वेद में इसे लक्ष्मी का भी स्वरूप माना है. वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः जो महादेव को अत्यन्त प्रिय है. बिल्व के मूल में ब्रह्मा मध्य भाग में विष्णु और अग्र (शीर्ष) भाग शिव का स्वरूप है. बेलपत्र की तीन पत्तियां त्रिदेव का प्रतिनिधित्व करती है. भगवान शंकर की पूजा में आक धतूरा के साथ बेलपत्र भी चढ़ाया जाता है. भगवान शंकर को बिल्व पत्र चढ़ाने से हर इच्छा पूरी होती है.
बिल्व पत्र का महत्व : स्कन्द पुराण के अनुसार बिल्व का वृक्ष संपन्नत्ता पवित्रता और सम्मृद्धि देने वाला है. शिव पर बिल्व पत्र चढ़ाने पर दरिद्रता दूर होती है. शिव पुराण के अनुसार बेलपत्र चढ़ाने से तीन जन्मों के पाप नष्ट होते हैं और कई जन्मों के समान पुण्य मिलता है. घर में बिल्व वृक्ष रखने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है. तीन पत्तियों वाले बिल्व पत्र के अलावा कुछ ऐसे बिल्व पत्र भी है जो दुर्लभ एवं चमत्कारी और अद्भुत होते है. शास्त्रों के अनुसार ऐसे दुर्लभ बिल्व वृक्ष की जड़ों में मां महेश्वरी इसकी शारवाओं में मां दक्षयायनी बिल्व पत्र की पत्तियों में मां पार्वती, इसके फूलों म मां गौरी और बेल पत्र के फलों में मां कात्यायनी का वास होता है.
कई अनुष्ठान का फल का उल्लेख : किराडू कहते हैं कि शिव पुराण के अनुसार जो मनुष्य अखंडित अर्थात पूर्ण बिल्व पत्र से नन्दिकेश्वर भगवान की पूजा करता है वह सभी पापों से मुक्त होकर शुद्ध हो जाता है. एक बिल्व पत्र चढ़ाने से ब्राह्मणों को शालिग्राम शिला के दान के समान, जया सोमयज्ञ के अनुष्ठान के समान महान पुण्य प्राप्त होता है. इतना ही नहीं हजारों करोड़ हाथियों का दान सैकड़ों यज्ञ के अनुष्ठान तथा करोड़ों कन्याओं के महादान के समान फल प्राप्त होता है. बिल्व पत्र के दर्शन और उसका स्पर्श समस्त पाप को नष्ट कर देता है. ऋग्वेद के अनुसार बिल्व वृक्ष के फल में शुद्ध घी मिलाकर लक्ष्मी मंत्र से हवन करने पर मां लक्ष्मी अत्यधिक प्रसन्न होती है.




















