कोटा : भारतीय रेलवे जनसंपर्क कर्मी कल्याण समिति की तरफ से कोटा में पहली बार अखिल भारतीय रेलवे जनसंपर्क सेमिनार आयोजित किया गया. समारोह में भाग लेने के लिए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पहुंचे. उनके सामने जनसंपर्क कर्मियों ने अपने कैडर का मुद्दा उठा दिया. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संबोधित करते हुए इस पूरे मुद्दे पर जनसंपर्क कर्मियों की मदद करने की बात कही है. उन्होंने आश्वासन दिया है कि रेल मंत्री और अधिकारियों से इस संबंध में चर्चा करेंगे. समारोह में डीआरएम अनिल कालरा व वरिष्ठ पीआरओ कमल जोशी बतौर अतिथि के तौर पर मौजूद थे.
बिरला ने कहा कि जनसंपर्क कर्मी जनता की आकांक्षा अपेक्षा को पूरा करने साथ रेलवे की योजनाएं और व्यवस्था की पूरी जानकारी देते हैं. रेलवे में काफी परिवर्तन नियमित हो रहा है, जिससे लोगों की आकांक्षा और अपेक्षा बढ़ने से भारतीय जनसंपर्क रेलवे अधिकारी की भूमिका भी बढ़ गई है. बदलते संचार के इस युग व परिस्थितियों को देखते हुए तथ्य पूर्ण संवेदनशीलता के साथ सूचना भी पहुंचाई जानी है. संचार की सभी तकनीक में एक्सपर्ट होना जरूरी है. जनता को रेलवे के ऐप्स की जानकारी में उनकी यात्रा को सुविधाजनक व सुरक्षित हो जाए.
प्रमोशन की जगह मिसलेनियस कैडर : जयपुर से आए सीनियर जनसंपर्क अधिकारी कमल जोशी ने बताया कि उनके पूरे देश भर में 12 लाख के आसपास रेलवे कर्मी हैं, लेकिन जनसंपर्क में केवल 140 कर्मचारी हैं. वर्तमान में मेन-स्ट्रीम मीडिया से लेकर सोशल मीडिया के साथ हर एरिया में रेलवे की गतिविधियों की जानकारी दी जा रही है. साल 1989-1990 में भारत के राजपत्र से जनसंपर्क विभाग रेलवे में घोषित किया गया था. आज 35 साल बाद भी इस राजपत्र को अंजाम नहीं दिया गया है. बरसों तक जनसंपर्क कर्मी एक ही पद पर रहता है और इस पद से रिटायर हो जाता है. हम जब प्रमोशन की बात करते हैं तो हमारे कैडर को मिसलेनियस कैडर रेलवे में बता दरकिनार कर दिया जाता है.
कैडर में उच्चतम पद जनसंपर्क से ही हो जाते हैं रिटायर : कोटा के जनसंपर्क इंस्पेक्टर शिव शंकर शाह ने कहा कि जनसंपर्क में पब्लिक रिलेशन इंस्पेक्टर, सीनियर पब्लिक रिलेशन इंस्पेक्टर और चीफ पब्लिक रिलेशन इंस्पेक्टर बनते हैं. इसके बाद जनसंपर्क अधिकारी बनते हैं. इनमें तीन-तीन साल में प्रमोशन होते हैं, लेकिन पद खाली नहीं होने पर प्रमोशन भी नहीं हो पाता है. दूसरी तरफ इसके बाद जनसंपर्क अधिकारी बनने के बाद इस पद से रिटायर हो जाते हैं, जबकि शेष अन्य कैडर में ऊंचे पदों पर जाकर भी रिटायरमेंट होता है.
रेलवे यूनियन बोली सृजित होने चाहिए पद, ग्रेड पे भी बढ़े : ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के सहायक महामंत्री मुकेश गालव, वेस्ट सेंट्रल मजदूर संघ के सचिव अब्दुल खालिक व रेलवे प्रमोटिंग ऑफिसर एसोसिएशन के शशि भूषण शर्मा मौजूद रहे. सभी ने रेलवे के जनसंपर्क विभाग के कर्मियों की समस्याओं को उचित स्तर पर उठाने को सहमति दी है. सभी ने कहा कि 24000 ट्रेनों से लाखों यात्रियों को अपने गंतव्य तक रोज पहुंचने वाली ट्रेनों की जानकारी देने वाले जनसंपर्क कर्मियों के कैडर की भी चिंता रेलवे को करनी चाहिए. यहां पर किसी भी ग्रेड में इंस्पेक्टर 4200 से भर्ती होते हैं, जबकि जनसंपर्क में यह भर्ती 2800 ग्रेड से हो रही है. इन सभी विसंगतियों को दूर करना चाहिए. साथ ही ट्रेंड बनाकर प्रमोशन भी लागू होने चाहिए. नए पद भी इसमें सृजित होने चाहिए. इस मौके पर पीआरओ बीएन गुप्ता भी मौजूद थे.
यह रखी गई हैं सात सूत्रीय मांगें :
- रेलवे मे कैडर के लिए एकीकृत प्राद्धोन्नति अवसर और कार्य प्रणाली को सामान करने की मांग की है.
- पब्लिक रिलेशन इंस्पेक्टर का अन्य विभाग के सुपरवाइजर की तरह भांति न्यूनतम प्रारम्भिक वेतनमान ग्रेड पे 4200 (लेवल-6) करना.
- रिक्त पदों पर भर्ती व कैडर क्षमता बढ़ाना.
- पीआरओ पद के लिए डिपार्मेंटल प्रमोशन की पात्रता वह भर्ती नियम में बदलाव. कार्य अनुभवों की सेवा शर्त पात्रता सीमित करना.
- जोन व मंडल में जनसंपर्क के पदों की संख्या बढ़ाना.
- वित्तीय उन्नयन के लिए सुपरवाइजरों का लेवल 8 व 9 तक ले जाने के लिए तत्काल प्रभाव से शामिल करना.
- अनुभवी सीनियर पीआरओ को मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी (सीपीआरओ) पद पर पदोन्नति करना.




















