राजस्थान में जयपुर के रहने वाले एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर ने 71 साल की उम्र में ऐसा कुछ कर दिया है कि देशभर में उनकी चर्चा हो रही है। ताराचंद अग्रवाल नाम के इस बुजुर्ग ने पत्नी के निधन के बाद खाली समय में बोरियत दूर करने के लिए दोबारा पढ़ाई शुरू की और फिर सीधे चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की परीक्षा पास करते हुए इतिहास रच दिया। पिछले हफ़्ते आए सीए के रिजल्ट के बाद देश को उनकी इस उपलब्धि के बारे में पता चला और अब वह लोगों खासकर युवाओं के सामने एक आदर्श उदाहरण बन गए हैं। अपनी इस सफलता का श्रेय उन्होंने अपने चाचा और श्रीमद्भगवत गीता से मिली एक सीख को दिया है।
देश की सबसे कठिन माने जाने वाली परीक्षाओं में से एक को पास करने वाले अग्रवाल के शुरुआती जीवन की बात करें तो उनका जन्म हनुमानगढ़ के संगरिया में एक किसान व व्यापारी के घर पर हुआ और वे आठ भाई-बहनों में चौथे नंबर के थे। उन्होंने संगरिया में ही स्कूली पढ़ाई की। साल 1974 में दर्शना से उनकी शादी हुई और 1976 में उनकी नौकरी स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर (अब भारतीय स्टेट बैंक) में क्लर्क के रूप में लग गई। इसके बाद लगातार 38 साल तक उन्होंने बैंक में ही अपनी सेवाएं दीं और साल 2014 में वह वहां से असिस्टेंट जनरल मैनेजर (सहायक महाप्रबंधक) के पद से रिटायर्ड हुए।
नवंबर 2020 में कोविड के दौरान उनकी पत्नी दर्शना अग्रवाल का निधन हो गया। इसके बाद अकेलेपन को दूर करने के लिए उन्होंने किताबों की ओर रुख किया और एकबार फिर से पढ़ाई शुरू कर दी। हालांकि शुरू में उनका मन नहीं लगा, लेकिन बच्चों से मिली एक सलाह ने उनका जीवन बदल दिया.
इस बारे में समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘जिंदगी में बहुत खालीपन आ गया था। हालांकि मेरे बच्चे और नाती-पोते मेरे साथ थे, फिर भी मैं ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहा था। फिर अपने बच्चों की सलाह पर मैंने भगवद् गीता पढ़ना शुरू किया और सीखने के प्रति अपने प्रेम को फिर से जगाया।’
ताराचंद ने कहा ‘इसके बाद जब मैंने बच्चों के सामने पीएचडी करने का प्रस्ताव रखा, तो उन्होंने मुझे कुछ और भी चुनौतीपूर्ण करने की सलाह दी। उन्होंने कहा सीए करो। यह मुश्किल है, लेकिन इससे आपको पहचान मिलेगी।’ मेरी पोती बोली, ‘अगर आप मेरा मार्गदर्शन कर सकते हो, तो खुद क्यों नहीं कर सकते?’
परिवारजनों से मिले प्रोत्साहन के बाद आखिरकार जुलाई 2021 में उन्होंने सीए कोर्स के लिए अपना पंजीकरण कराया। उन्होंने मई 2022 में फाउंडेशन परीक्षा पास की, जनवरी 2023 में इंटरमीडिएट परीक्षा पास की, और मई 2024 में फाइनल परीक्षा के लिए अपनी पहली कोशिश में असफल होने के बाद, आखिरकार इस साल उसे भी पास कर लिया। सीए परीक्षा के परिणाम 6 जुलाई को ICAI की वेबसाइट पर घोषित किए गए।
पढ़ाई के दौरान अपने संघर्ष को बताते हुए ताराचंद ने कहा, ‘कंधे के दर्द से जूझने के बावजूद मैंने हर दिन 10 घंटे तक पढ़ाई की और तैयारी के लिए घंटों लिखने का अभ्यास भी किया।’ सबसे खास बात यह है कि परीक्षा की तैयारी के लिए उन्होंने किसी तरह की कोचिंग जॉइन नहीं की थी, बल्कि किताबों और यूट्यूब वीडियो पर भरोसा किया।
तैयारी के लिए वह घर के साथ-साथ कभी-कभी अपने छोटे बेटे के ऑफिस में जाकर भी पढ़ाई किया करते थे। उनका बड़ा बेटा ललित दिल्ली में सीए है, जबकि छोटा बेटा अमित टैक्स प्रैक्टिस में है।
सीए बनने के लिए बच्चों से मिली मदद का जिक्र करते हुए ताराचंद ने कहा कि ‘उन लोगों ने मुझे जो प्रोत्साहन दिया, वह बहुत जरूरी था। उन्होंने मुझे एक लैपटॉप लाकर दिया, रजिस्ट्रेशन में मदद की और हर कदम पर मेरा साथ दिया।’ हालांकि उन्होंने अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने चाचा और उनसे मिली सीख को दिया। उन्होंने कहा कि चाचा ने मुझे गीता पढ़ना सिखाया था और वह कहते थे, ‘जो भी काम हाथ में लो, दृढ़ निश्चय के साथ करो। यह एक ऐसा मूल्य है जिसका वह हर दिन पालन करते थे।’ ताराचंद ने कहा, ‘मैं जो भी काम करता हूं, उसे दृढ़ता से करता हूं। गीता ने मुझे यही सिखाया है।’




















