राजस्थान में इस बार मानसून की धमाकेदार एंट्री हुई है। 18 जून को प्रदेश में प्रवेश करने के बाद सिर्फ 5 दिन में ही मानसून ने जून महीने की औसत बारिश का कोटा पूरा कर दिया। अब तक (1 जून से 22 जून तक) राज्य में कुल 70.2 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि पूरे जून माह की औसत बारिश सामान्यतः 55 मिमी होती है। यह आंकड़ा साफ संकेत देता है कि इस बार प्रदेश में मानसून की रफ्तार तेज है।
पिछले साल की तुलना में इस बार बेहतर बारिश दर्ज की गई है। जून 2024 में पूरे महीने में केवल 50.3 मिमी बारिश हुई थी, जो औसत से करीब 9 फीसदी कम थी। वहीं इस बार जून के तीसरे हफ्ते में ही राज्य औसत से काफी आगे निकल चुका है।
पूर्वी राजस्थान में जमकर बरसे बादल
जिलेवार आंकड़ों की बात करें तो 24 ऐसे जिले हैं जहां जून महीने की औसत बारिश से भी ज्यादा पानी अब तक बरस चुका है। इन जिलों में अधिकतर जिले पूर्वी राजस्थान के हैं। सबसे ज्यादा बारिश कोटा और भीलवाड़ा जिलों में दर्ज की गई है।
कोटा में 1 से 22 जून के बीच 164.8 मिमी बारिश हो चुकी है, जबकि यहां जून की औसत बारिश 90 मिमी मानी जाती है। यानी इस बार कोटा में औसत से 83 फीसदी ज्यादा बारिश हो चुकी है। इसी तरह भीलवाड़ा में 163.3 मिमी पानी बरस चुका है, जो औसत (66.4 मिमी) से करीब 146 फीसदी ज्यादा है।
इन जिलों में औसत से ज्यादा बारिश
पाली, नागौर, जोधपुर, जालोर, चूरू, टोंक, सिरोही, सीकर, सवाई माधोपुर, राजसमंद, कोटा, करौली, झुंझुनूं, जयपुर, धौलपुर, दौसा, चित्तौड़गढ़, बूंदी, भीलवाड़ा, भरतपुर, बारां, बांसवाड़ा, अलवर और अजमेर जैसे जिलों में भी जून माह की सामान्य बारिश का आंकड़ा पार हो चुका है।
इन जिलों में किसानों और ग्रामीणों के चेहरों पर राहत की मुस्कान है। जलभराव और सिंचाई के लिए पानी की स्थिति बेहतर होती दिख रही है। जल संसाधनों में भी वृद्धि हुई है, जिससे आगामी कृषि सीजन के लिए अनुकूल माहौल बन रहा है।
जैसलमेर सूखा, सिर्फ 1.3 मिमी बारिश
राज्य के पश्चिमी हिस्से में मानसून की स्थिति अब भी कमजोर बनी हुई है। खासकर जैसलमेर जिले में अब तक सबसे कम बारिश हुई है। 1 जून से 22 जून के बीच यहां केवल 1.3 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि यहां जून महीने की औसत बारिश 24.6 मिमी होती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पश्चिमी राजस्थान में अब भी मानसून को गति पकड़नी बाकी है।
आगे क्या?
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में और तेज बारिश हो सकती है, खासकर पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में। हालांकि पश्चिमी हिस्सों में मानसून को रफ्तार पकड़ने में अभी कुछ समय लग सकता है।
प्रदेश में अब तक की बारिश जहां एक ओर फसलों के लिए वरदान बनकर आई है, वहीं स्थानीय प्रशासन और नगर निकायों के लिए जलभराव की चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। ऐसे में आगामी बारिश से पहले व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की जरूरत है।




















