जयपुर : प्रदेश में मानसून सत्र 2025 के दौरान 1 जुलाई से 23 जुलाई तक औसतन 99.57 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से कहीं अधिक है. इस अवधि में राज्य में कुल 327.05 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि सामान्य वर्षा 163.88 मिमी मानी जाती है. 31 जिलों में सामान्य से 60 फीसदी अधिक वर्षा हुई है. भजन लाल सरकार ने आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों की व्यापक तैयारियां की है. इसके साथ जान-माल की हानि के भी नियम तय कर दिए हैं.
राज्य एवं जिला प्रशासन की तैयारियां : मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने बताया कि जयपुर में राज्य आपातकालीन परिचालन नियंत्रण कक्ष (एसईओसी) संचालित है, जिसके टोल फ्री नंबर 1070 व 112 हैं. सभी जिलों में बाढ़ नियंत्रण कक्ष क्रियाशील किए गए हैं, जिनके टोल फ्री नं. 1077 पर कॉल किया जा सकता है. प्रत्येक प्रभावित जिले को बाढ़ बचाव एवं राहत गतिविधियों के संभाग स्तरीय जिला मुख्यालयों को 20-20 लाख रुपये और अन्य जिलों को 10-10 लाख रुपये की अग्रिम राशि स्वीकृत की गई है. एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की टीमें प्रभावित जिलों में तैनात कर दी गई हैं. इसके साथ ही राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर बाढ़ बचाव के लिए नागरिक सुरक्षा स्वयं सेवकों की त्वरित आपदा टीमें कार्यरत हैं. अभी तक एसडीआरएफ, एनडीआरएफ एवं सिविल डिफेंस की टीमों द्वारा राज्य के विभिन्न जिलों में पानी में फंसे 302 व्यक्तियों का सफल रेस्क्यू किया गया है. मानसून सत्र के दौरान राहत और बचाव कार्यों के किए भारतीय सेना और वायु सेना से समन्वय स्थापित किया जा चुका है ताकि आपदा की स्थिति में आपदा जनित हानि को कम किया जा सके.
जिला कलेक्टर को निर्देश : उन्होंने बताया कि जिला कलेक्टरों को जलभराव एवं संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में त्वरित राहत कार्य के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं. प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी राहत शिविरों की स्थापना की गई है, जहां भोजन, पेयजल, दवाइयां और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है. चिकित्सा दलों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया है. जल जनित रोगों की रोकथाम के लिए दवाइयों और क्लोरीन की गोलियों का वितरण किया जा रहा है. पानी निकासी एवं साफ-सफाई हेतु नगर निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करें एवं सफाई पर विशेष ध्यान दें.
सभी जिला कलक्टर द्वारा मानसून के दौरान बाढ़ बचाव के लिए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठकों का भी आयोजन कर मानसून के दौरान जनहानि, घायलों, पशुहानि, मकान क्षति आदि से प्रभावितों को एसडीआरएफ नॉर्म्स के अनुसार तत्काल सहायता प्रदान किए जाने के लिए निर्देशित किया गया.
ये भी मिलेगी राहत : सीएम भजन लाल ने बताया कि एसडीआरएफ नॉर्म्स के अंतर्गत अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं से सार्वजनिक परिसंपत्तियों यथा स्टेट हाईवे व मुख्य जिला सड़कों के क्षतिग्रस्त होने पर उनके तात्कालिक मरम्मत हेतु एक लाख रुपये प्रति किलोमीटर, ग्रामीण सड़कों के क्षतिग्रस्त होने पर 60,000 रुपये प्रति किलोमीटर एवं विद्यालय भवनों, प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के क्षतिग्रस्त होने पर अधिकतम 2 लाख रुपये प्रति भवन व महिला मंडल, युवा केंद्रो, पंचायत घरों, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं सामुदायिक भवनों के क्षतिग्रस्त होने पर अधिकतम 2.50 लाख रुपये प्रति भवन, लघु सिंचाई योजना के क्षतिग्रस्त होने पर प्रति योजना 2 लाख रुपये अधिकतम दिये जाने का प्रावधान है.
अग्रिम तैयारियों के निर्देश : बता दें कि मुख्यमंत्री भजनलाल की अध्यक्षता में 20 जुलाई को आयोजित बैठक में राज्य के सभी संबंधित विभागों को आगामी अधिक वर्षा एवं संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अग्रिम तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए. सीएम भजन लाल ने कहा था कि प्रदेश में अधिक बारिश खुशी का एक प्रतीक है, लेकिन इस प्राकृतिक आपदा से किसी तरह की हानि नहीं हो यह सुनिश्चित करना भी सरकार की जिम्मेदारी है. प्रत्येक संबंधित अधिकारी इस प्राकृतिक आपदा में हर एक व्यक्ति को राहत देने के लिए जिम्मेदारी से कार्य करें. उन्होंने कहा था कि सरकार किसी भी तरह की संसाधनों में और राहत कार्यों में कमी नहीं आने देगी. इसके लिए पूर्व में सभी आदेश जारी की जा चुके हैं. इतना ही नहीं सीएम भजनलाल शर्मा ने चार अधिकारियों को अपने कार्य में लापरवाही बरतने पर कार्य से मुक्त भी कर दिया था.




















