सीकर: जिले में महिलाएं पर्यावरण संरक्षण के अनूठे प्रयास कर रही हैं. यहां पेड़ों को भाई मानकर राखी बांध जा रही है और खाद एवं पानी रूपी मिठाइयां खिलाई जा रही है. बेबी प्लांट के नाम से मशहूर डॉ. अभिलाषा रणवां और उनकी टीम करीब एक दशक से पेड़-पौधों के साथ रक्षाबंधन मना रही हैं. ऐसा पर्यावरण जागरूकता के लिए कर रही हैं. इस बार भी उन्होंने अपने भाई को राखी बांधने से पहले सीकर के स्मृति वन में पेड़-पौधों को राखी बांधी. राजस्थानी वेशभूषा में सज धज कर अभिलाषा की टीम स्मृति वन पहुंची व पौधों को रक्षा सूत्र बांधे.
डॉ. अभिलाषा रणवां ने बताया कि वे 2011 से पिता की स्मृति में पौधे लगा रही हैं. अब तक वे और उनकी टीम राज्य भर में 5 लाख से अधिक पौधे लगा चुकी. इनमें साढे तीन लाख पौधे अब पेड़ बना चुके. हम इस संकल्प के साथ पौधे लगाते हैं कि वह पेड़ बनना चाहिए. उसके सुरक्षा की जिम्मेदारी हमारी होती है. इसीलिए उनकी सुरक्षा के संकल्प के लिए हर रक्षाबंधन का त्योहार हम इन पेड़ पौधों के साथ मनाते हैं.
भाई से पहले पेड़ को राखी: अभिलाषा ने बताया कि रक्षाबंधन भाई-बहन के एक-दूसरे का ख्याल रखने की पवित्र भावना का प्रतीक है. हमारा उद्देश्य लोगों को पर्यावरण से जोड़ना है ताकि वे इसके संरक्षण को प्रेरित हों. मैं और मेरी टीम भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले खुद के लगाए पेड़ पौधों के तनों और टहनियों के राखी बांधते हैं. पेड़ हमारे जीवन की सुरक्षा देते हैं. हमारा दायित्व है कि हम सब भी इनकी सुरक्षा करें.
टीम की सदस्य ममता चौधरी ने बताया कि रक्षाबंधन पर भाई-बहन को एक दूसरे को पौधा गिफ्ट करना चाहिए. रक्षाबंधन पर लगाया यह पौधा दोनों भाई-बहन के लिए हमेशा प्रेम का प्रतीक बन जाएगा. इसे देखेंगे तो उन्हें एक दूसरे की याद आएगी. पर्यावरण को संरक्षण करने के लिए घर में होने वाले अन्य कार्यक्रमों में भी ग्रीन गोल्ड यानी मेहमानों को पेड़ पौधे गिफ्ट देने चाहिए.




















