बाड़मेर. जैसलमेर में पूर्वजों और महापुरुषों की छतरियों को लेकर उपजा विवाद अब सीमाएं लांघते हुए बाड़मेर तक आ पहुंचा है. जैसलमेर की बासनपीर छतरियों पर कथित तोड़फोड़ से आहत बाड़मेर के लोगों ने भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी और आवाज़ उठाई है कि यह महज एक आस्था नहीं आत्मसम्मान का सवाल है.
बाड़मेर के लोग भी अब इस मुद्दे में अपनी सहभागिता दिखा रहे हैं. सवाल यही है कि आखिर महापुरुषों और पूर्वजों के स्थलों को लेकर बार-बार विवाद क्यों खड़े होते हैं? क्या ये आस्था की लड़ाई है या फिर राजनीति? आइए जानते हैं बाड़मेर के लोगों की राय..
समाजसेवी रमेश सिंह इंदा ने कहा कि बाड़मेर-जैसलमेर में असामाजिक तत्वों द्वारा जो पूर्वजो व महापुरुषों की छतरियों के साथ तोड़फोड़ के बाद उपजे विवाद की घटना को निंदनीय बताया है. उन्होंने कहा कि असामाजिक तत्वों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही हो बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं हो इसको लेकर भी समाज व प्रशासन को कड़े कदम उठाने चाहिए.
ग्रामीण अनिल सिंह ने बताया कि इस घटना ने प्रदेश ही नही देश को झकझोर कर रख दिया है. कुछ जिहादी सोच वाले लोगो की इस घटना से पूरा देश आहत है. उन्होंने कहा कि इस तरीके की घटना हम बर्दाश्त नही करेगें. वहीं विक्रम कुमार के मुताबिक हम शांति चाहते है लेकिन इस कद्र भी नही कि हमारे महापुरुषों के सम्मान के साथ छोड़छाड़ की जाए.
बाड़मेर जिले से भी बड़ी संख्या में लोग जैसलमेर के बासनपीर पहुंचे है. हिन्दुसिंह सोढ़ा बताते है कि सम्मान की लड़ाई के लिए हमेशा तैयार है. बाड़मेर-जैसलमेर के आपसी भाईचारे की मिसाल देशभर में रही है लेकिन इस तरह पूर्वजो व महापुरुषों की छतरियों से छोडख़ानी बर्दाश्त नही की जाएगी.
बाड़मेर के लोगों की राय साफ है कि पूर्वजों के नाम पर विवाद नहीं सम्मान चाहिए लेकिन जब आस्था से ज़्यादा राजनीति हावी हो जाती है तो सवाल भी खड़े होते हैं. ऐसे में बाड़मेर के लोगो का कहना है कि बाड़मेर-जैसलमेर का आपसी भाईचारा कायम रहना चाहिए.




















