मकराना: जब संकल्प बड़ा हो और सोच समाज हित की हो, तो बदलाव की नई इबारत लिखी जाती है. मकराना पंचायत समिति की ग्राम पंचायत की सरपंच माया कंवर और उनके पति जेठू सिंह राठौड़ ने इसी सोच के साथ पर्यावरण प्रेमी परिवार की शुरुआत की और देखते ही देखते यह पहल एक जन आंदोलन बन गई. आज इस अभियान से जुड़े लोग न केवल हजारों पौधे लगा चुके हैं, बल्कि हर पौधे को पेड़ बनाने का संकल्प भी निभा रहे हैं.
मकराना के इस परिवार की कहानी आज पूरे राजस्थान के लिए प्रेरणा बन गई है. माया कंवर और जेठू सिंह का पर्यावरण प्रेम, समाज सेवा के साथ प्रकृति से जुड़ाव का अद्भुत उदाहरण बनकर पेश आ रहा है. बारिश के मौसम में यह परिवार और उनकी टीम दिन-रात मेहनत कर हरियाली का स्वप्न साकार कर रही है.
11000 पौधे और पेड़ बनने का संकल्प : कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी से लोगों की मौतों ने जेठू सिंह राठौड़ को झकझोर दिया. इसी से प्रेरित होकर उन्होंने परिवार और मित्रों के साथ मिलकर एक पर्यावरण जागरूकता मुहिम शुरू की. आज तक यह पर्यावरण प्रेमी परिवार 11 हजार से अधिक पौधों का रोपण कर चुका है, जिनमें से अधिकांश अब वृक्ष का रूप ले चुके हैं. इन पौधों की देखरेख और सुरक्षा स्वयं परिवार और समाज के अन्य सदस्य करते हैं.
इस अभियान में सभी जातियों और वर्गों के लोग शामिल हैं. यह परिवार सिर्फ हरियाली नहीं, सामाजिक समरसता भी बढ़ा रहा है. लोग एक-दूसरे के दुख-दर्द में साथ देते हैं और समाज की एकता को मजबूत करते हैं. जेठू सिंह बताते हैं कि उन्होंने शुरुआत में 5 साल के कार्यकाल के लिए 5000 पौदे लगाने का लक्ष्य रखा था. देश के तहत ग्राम पंचायत में हर साल 1000 यानी हर दिन लगभग तीन पौधा लगाने थे, लेकिन गांव वालों का उत्साह इतना रहा कि अब तक में गांव में 11000 से ज्यादा पौधा लगा चुके हैं.
2000 पौधे, 550 लोग, 90 मिनट में अद्भुत श्रमदान : शिक्षाविद द्वारका प्रसाद शर्मा ने बताया कि हाल ही में एक आयोजन के दौरान ग्राम पंचायत की पहल पर वामिनी गोमाता स्मृति उपवन में 550 लोगों ने 90 मिनट तक श्रमदान करते हुए 2000 पौधे लगाए. इस दौरान एक परिवार ने अपनी दिवंगत सदस्य रामेश्वरी कंवर की स्मृति में 51 पौधे लगाकर मृत्युभोज न करने का संकल्प भी लिया. यह कार्यक्रम एक पेड़ मां के नाम के तहत मकराना विधायक जाकिर हुसैन गैसावत और बंशी महाराज की उपस्थिति में हुआ. स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि सरपंच और उनके परिवार लगातार गांव वालों को इस दिशा में प्रेरित कर रहा है, ताकि मृत्यु भोज जैसी कुप्रथा पर विराम लगाकर, लोगों को पर्यावरण के प्रति सचेत किया जा सके. स्थानीय विधायक जाकिर हुसैन ने भी गांव वालों की इस मुहिम की सराहना की है.
बांस और जूट की रस्सी से बना रहे प्राकृतिक ट्री गार्ड : इस मुहिम के लिए जहां सरपंच माया कंवर अपनी टीम और गांव वालों के साथ-साथ युवाओं को श्रेय देती हैं. वहीं, उनके पति जेठू सिंह राठौड़ बताते हैं कि पर्यावरण और पौधों की सुरक्षा के लिए वे लोहे के ट्री गार्ड की बजाय बांस और सुतली का उपयोग करते हैं. लोहे के गार्ड बड़े होते ही पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए प्राकृतिक संसाधनों से सुरक्षा दी जाती है. उनकी टीम ने अब तक कई पेड़ों से फंसे ट्री गार्ड हटाकर उन्हें जीवनदान दिया है.
घर की छत बनी नर्सरी, आम-नीम के पौधे तैयार : गांव के अध्यापक विजय कुमार ने जानकारी दी कि कैसे पर्यावरण प्रेमी यह परिवार न सिर्फ स्कूल और गांव के आसपास के इलाकों को हरा भरा बनाने का प्रयास कर रहा है, बल्कि लोगों को भी लगातार प्रोत्साहित कर रहा है. इस परिवार ने अपने मकान की छत को नर्सरी बना दिया है. वहां 250 से ज्यादा आम के पौधे तैयार किए जा चुके हैं. इन पौधों को घर-घर जाकर वितरित भी किया गया है. इसके लिए आम की गुठलियों को इकट्ठा कर उगाया जाता है. पौधों की देखरेख के दौरान इनकी टीम स्पीकर और माइक से भजन सुनाकर पौधों के साथ भावनात्मक रिश्ता जोड़ती है. इस प्रक्रिया को वे सजीव ऊर्जा संचार मानते हैं, जिससे पौधे अच्छी तरह विकसित होते हैं.




















