अलवर : विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि प्रदेश की भाजपा सरकार की सोच विकास की जगह अब केवल लोगों का ध्यान भटकाने वाले कार्यों तक सीमित रह गई है. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने सस्ती लोकप्रियता के लिए खैरथल-तिजारा जिले का नाम बदलकर भर्तृहरि नगर किया है, जबकि खैरथल तिजारा का क्षेत्र भर्तृहरिधाम के आसपास भी नहीं आता. इस कारण स्थानीय लोगों में सरकार के फैसले को लेकर खासा विरोध है. प्रतिपक्ष नेता जूली ने राज्य सरकार से जल्दबाजी में लिए गए इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है.
प्रतिपक्ष नेता जूली ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में बताया कि महीने भर पहले उन्होंने राज्य सरकार को पत्र भेजकर अलवर में लगने वाले भर्तृहरि महाराज मेले के लिए मंदिर परिसर एवं आसपास के इलाके में समुचित व्यवस्था करने का आग्रह किया था. इस पत्र पर सरकार की ओर से कार्रवाई करने के बजाय सस्ती लोकप्रियता के लिए खैरथल तिजारा जिले का नाम बदलकर भर्तृहरि नगर के नाम पर कर दिया. भर्तृहरि महाराज की तपोस्थली के आसपास अलवर, मालाखेड़ा व थानागाजी का क्षेत्र रहा है, जबकि यह क्षेत्र खैरथल तिजारा जिले में नहीं आता. जिले का नाम बदलने को लेकर स्थानीय लोगों में विरोध है. इस कारण राज्य सरकार को जल्दबाजी में लिए गए इस फैसले पर पुनर्विचार करने की जरूरत है.
नेता का काम जिले की पहचान बनाना : कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा कि किसी भी नेता का कार्य अपने क्षेत्र और जिले की पहचान बनाने व आगे बढ़ाने का होना चाहिए, न कि उसका नाम मिटाने का. उन्होंने आरोप लगाया कि डेढ़ साल से यह सरकार नाम परिवर्तन के अलावा कुछ और नहीं कर रही है. भाजपा सरकार के शासन में अपराध, प्रशासनिक लापरवाही के साथ प्रदेश गर्त में जा रहा है, लेकिन राज्य सरकार की प्राथमिकता में जनता नहीं, बल्कि लोकलुभावन बातें करना है.
भर्तृहरि की तपोभूमि आस्था का केन्द्र : भर्तृहरि सभी के लिए पूज्य हैं. महाराजा भर्तृहरि की तपोभूमि अलवर में थानागाजी के समीप सरिस्का के जंगलों में स्थित है और सभी की श्रद्धा का केंद्र है. कांग्रेस सरकार के दौरान भर्तृहरि से जुड़े स्थलों के विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए थे. इनमें भर्तृहरि गुफा और मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण, तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं, आसपास के क्षेत्रों में सड़क, जलापूर्ति और बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों को प्राथमिकता दी थी. इन प्रयासों के चलते भर्तृहरिधाम प्रमुख आध्यात्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हुआ.
जरूरत औद्योगिक प्रगति व रोजगार की : उन्होंने कहा कि खैरथल, किशनगढ़ बास, हरसोली, कोटकासिम, बीबीरानी, मुंडावर, तिजारा जैसे दर्जनों स्थल ऐतिहासिक, व्यावसायिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान रखते हैं. सरकार को इस क्षेत्र के विकास के लिए औद्योगिक प्रगति और जनकल्याणकारी योजनाओं पर ध्यान देने की जरूरत है. इस क्षेत्र के विकास, नौजवानों को रोजगार देने एवं इस क्षेत्र में एजुकेशनल इंस्टिट्यूट खोलने की जरूरत है. सरकार को स्थानीय लोगों के साथ संवाद कर उनकी सहमति से ऐसे निर्णय होने चाहिए. खैरथल-तिजारा का नाम बदलना सरकार का निर्णय सही नहीं है. राज्य सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए.




















