बूंदी : जिले में पिछले डेढ़ माह से लगातार जारी बारिश अब आफत की बारिश बनती नजर आ रही है. बीते डेढ़ माह में जहां तेज वर्षा से नदी, नाले ओर बांध लबालब हो गए हैं. वहीं इन बीते 40 दिनों में प्राकृतिक आपदा के कारण 10 से ज्यादा लोगों ने जान गंवाई है. जिले में 15 जून के बाद सक्रिय हुआ मानसून अब भी बरस रहा है. बारिश के दौरान किसी की पानी के बहाव में बहने से जान गई तो किसी पर आकाशीय बिजली गिरी. कोई खदान में डूबा तो कोई बांध के तेज बहाव में बह गया. जिले के अलग अलग स्थानों से करंट लगने से मौत के भी मामले सामने आए हैं. हालांकि ऐसे कई मामले भी देखने को मिले हैं जिसमें जिला प्रशासन द्वारा त्वरित कार्यवाही कर समय रहते रेस्क्यू चलाकर कई लोगों की जान बचाई है.
करंट लील गया एक दर्जन से अधिक की जिंदगियां : जिले में पानी के साथ बिजली ने भी लोगों पर खूब सितम ढहाए. बीते डेढ़ माह की ही बात करे तो बूंदी जिलें में विद्युत के हादसों में एक दर्जन से अधिक लोग अकाल मौत का शिकार हो चुके हैं. विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता कार्यालय से प्राप्त जानकारी की माने तो बीते एक डेढ़ माह में करीब एक दर्जन लोगों की करंट लगने से मौत हुई है. विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता आर के बैरवा ने बताया कि कई हादसे होते हैं और हुए भी हैं. सभी को नियमानुसार मुआवजा दिया जाता है, उसका अलग प्रॉसेस है.
रेस्क्यू चलाकर कई लोगों की बचाई जान : बाढ़ नियंत्रण प्रभारी सत्यवान शर्मा ने बताया कि बूंदी जिले में गत वर्ष के मुकाबले अभी तक दो गुनी वर्षा दर्ज की जा चुकी है. लगातार वर्षा के कारण जिले भर के 20 बांध पानी से लबालब हो चुके हैं. अधिकांश नदी, नाले उफान पर होने से कई मार्ग अवरुद्ध होने की सूचना भी समाने आई है. प्रशासन द्वारा पिकनिक स्पॉट और जलभराव क्षेत्रों में रेस्क्यू टीमों को तैनात किया गया है. जो लोगों को राहत पहुंचने के साथ उन्हें जलभराव इलाकों से निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही है.
कलेक्टर ने देखे बाढ़ के हालत : जिला कलक्टर अक्षय गोदारा ने पुलिस अधीक्षक के साथ लाखेरी उपखंड क्षेत्र का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया. मानसून की संभावित परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने नदी-नालों पर बनी पुलियाओं और बांधों की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए. जिला कलक्टर ने बाबई में चाकन नदी की पुलिया का निरीक्षण किया. यहां उन्होंने चाकन बांध की भराव क्षमता और डाउन स्ट्रीम में सुरक्षा उपायों के संबंध में अधिकारियों से जानकारी ली. इस दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने जिला कलक्टर से पुलिया की ऊंचाई बढ़ाने की मांग की, ताकि बरसात के मौसम में आवागमन बाधित न हो. इसके बाद जिला कलक्टर ने बलवन गांव पहुंचकर वहां के तालाब का निरीक्षण किया और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी ली. इसके बाद जिला कलक्टर लाखेरी के समीप मेज नदी की पुलिया पर पहुंचे. उन्होंने वहां पानी के कटाव के कारण खिसक रही मिट्टी का जायजा लिया.
उन्होंने मौके पर मौजूद सार्वजनिक निर्माण विभाग और रिडकोर के अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुलिया की मरम्मत का कार्य शीघ्रता से और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाएं. उन्होंने निर्देश दिए कि मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद सभी सुरक्षा मानकों की जांच करने के उपरांत ही पुलिया पर आवागमन पुनः शुरू किया जाएं, ताकि किसी भी प्रकार की कोई अप्रिय घटना न हो. इस दौरान लाखेरी उपखंड अधिकारी अरविंद शर्मा, तहसीलदार राजेंद्र मीणा सहित संबधित अधिकारी मौजूद रहें.
अब तक के बड़े रेस्क्यू कई की बचाई जान : बाढ़ नियंत्रण प्रभारी सत्यभान शर्मा ने बताया कि जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा के निर्देश पर जिला मुख्यालय के साथ 6 उपखंड मुख्यालयों पर भी रेस्क्यू टीमों को तमाम संसाधनों के साथ तैनात किया हुआ है. जहां से भी किसी भी घटना की सूचना मिलती है रेस्क्यू टीम पहुंच रही है. उन्होंने बताया कि गत 18 जुलाई को लाखेरी उपखंड के लालपुलिया के पास बाढ़ में फंसे 30 से 40 लोगों को बचाना प्रशासन के लिए चुनौती था. एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस की टीम ने कई घंटो की मशक्कत के बाद बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया.
रात भर टापू पर फंसे ग्रामीण को बचाया : शर्मा ने बताया कि इसी प्रकार 18 जुलाई को ही दबलाना थाना क्षेत्र के रुणिजा के खाल में एक ग्रामीण के फंसे होने की सूचना पर रेस्क्यू टीम में शामिल जवानों ने रात में ही रेस्क्यू चलाकर ग्रामीण को अल सुबह तक सुरक्षित निकाला.
वहीं 28 जुलाई को डाबी थाना क्षेत्र के धनेश्वर की एरु नदी में आए उफान में 7 लोगों के फंसे होने की सूचना से जिला मुख्यालय पर हड़कंप मच गया. कलेक्टर अक्षय गोदारा के निर्देश पर तत्काल बूंदी और तालेड़ा से रेस्क्यू टीम मौके पर भेजी गई. पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस की टीम ने रात में ही पानी में फंसे लोगों को निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया.




















