जयपुर: प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश के बाद डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मौसमी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ने लगा है. हालात यह है कि बीते कुछ माह में मौसमी बीमारियों के आंकड़े दो गुना तक बढ़ गए हैं. खासकर डेंगू का डंक सबसे ज्यादा खतरनाक होता नजर आ रहा है. अजमेर, कोटा, जयपुर, बीकानेर जैसे जिले डेंगू के हाई अलर्ट पर मोड़ पर हैं. जबकि जैसलमेर में मलेरिया के रिकॉर्ड मामले देखने को मिले हैं. बढ़ती मौसमी बीमारियों के बाद हाई रिस्क जिलों में चिकित्सा विभाग अलर्ट मोड़ पर आ गया है.
चिकित्सा विभाग ने अधिकारियों को मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं. बढ़ती मौसमी बीमारियों को लेकर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि प्रदेश में मानसून के दौरान अच्छी बारिश हो रही है. बारिश थमने के बाद मौसमी बीमारियों के प्रसार की आशंका बनी रहती है. ऐसे में सभी जिलों में पुख्ता तैयारियों के साथ मौसमी बीमारियों को प्रभावी प्रबंधन के निर्देश जारी किए गए हैं. चिकित्सा मंत्री ने कहा कि मौसमी बीमारियों से ग्रसित रोगियों को तत्काल प्रभाव से जांच एवं उपचार उपलब्ध करवाया जाए. उन्होंने राज्य स्तर के अधिकारियों को सभी जिलों पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं.
डेंगू का डंक: हर साल बारिश और उसके बाद प्रदेश में डेंगू के मामले सबसे अधिक देखने को मिलते हैं. ऐसे में बीते दो माह में डेंगू के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. आंकड़ों की बात की जाए, तो पूरे प्रदेश में डेंगू के 500 से अधिक मामले देखने को मिले हैं. इसके अलावा कुछ ऐसे जिले हैं, जिनमें लगातार डेंगू के केस बढ़ रहे हैं.
मलेरिया और चिकनगुनिया के मामले भी बढ़े: इसके अलावा प्रदेश में मलेरिया और चिकनगुनिया के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है. इन दोनों मौसमी बीमारियों के केस पिछले कुछ माह से तेजी से बढ़ने लगे हैं. हालांकि गनीमत है चिकित्सा विभाग के अनुसार मौसमी बीमारियों से अभी तक किसी मरीज की जान नहीं गई है.
- प्रदेश में मलेरिया के 411 मामले आए सामने
- सर्वाधिक 115 मलेरिया के केस जैसलमेर में दर्ज
- बाड़मेर में 56, उदयपुर में 51 और सिरोही में 21 मामले दर्ज
- चिकनगुनिया के 181 मामले आए सामने
- सर्वाधिक 49 केस जयपुर में, 27 केस उदयपुर में
हाई रिस्क पर विशेष फोकस: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ अमित यादव का कहना है कि मौसमी बीमारियों को देखते हुए मच्छर रोधी गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा हाई रिस्क जिलों में एन्टीलार्वा गतिविधियों पर विशेष फोकस किया जा रहा है.




















