अजमेर: तीर्थ गुरु पुष्कर राज में सावन में ब्रह्मा, विष्णु और महेश की भक्ति की बयार बह रही है. जहां सावन में पुष्कर के प्राचीन शिवालयों में भक्तों का तांता लगा है, वहीं श्री रमा बैकुंठनाथ मंदिर में भी भक्ति की सरिता बह रही है. दक्षिण शैली से निर्मित 101 वर्ष प्राचीन मंदिर में सावन में छोटी तीज से बड़ी तीज तक झूला महोत्सव मनाया जा रहा है. विशेष कर एकादशी पर मंदिर परिसर में बड़े हिंडोले लगाए गए. भगवान श्रीरमा बैकुंठनाथ का विशेष शृंगार किया गया. मंदिर परिसर में अद्भुत और आकर्षक झांकियां सजाई गई. देर रात तक श्रद्धालु दर्शन करने आते रहे.
बड़ी संख्या में भक्त आए : मंदिर के प्रबंधक सत्यनारायण रामावत ने बताया कि श्री रमा बैकुंठनाथ मंदिर में हर साल तीन बड़े महोत्सव होते हैं. उनमें झूला महोत्सव 27 जुलाई छोटी तीज से शुरू हुआ और 12 अगस्त तक चलेगा. एकादशी पर बड़े झूले लगाए गए. पुष्कर ही नहीं, आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में भक्त आए. रामावत बताते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से आधारित विद्युत चलित झांकियां लगाई गई.
झांकियों ने मोहा मन: एकादशी पर विशेष कर पांच झांकियां प्रदर्शन को रखी. इनमें भगवान नृसिंह, गाय माता का दूध निकालते यशोदा माता, शिव और नन्दी के अलावा जसवंतगढ़ से आए कलाकारों ने भी जीवंत झांकियां बनाई. अनिमे मीरा के हाथ में प्याला है, जिसमें श्री कृष्ण खड़े हैं. एक अद्भुत झांकी दुर्गा मैया की है. मंदिर के भीतर भगवान का कालिया दमन के रूप में विशेष शृंगार हुआ.
बता दें कि, दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार झूला महोत्सव 101 वर्ष से श्री रमा बैकुंठनाथ मंदिर में मनाया जा रहा है. स्थानीय लोग नए रंगजी के नाम से जानते हैं. मंदिर में छोटी तीज से बड़ी तीज तक झूला महोत्सव चल रहा है. एकादशी को बड़े हिंडोले लगाए जाते हैं. हर दिन भगवान की अलग-अलग लीलाओं और अवतार के रूप में नयनाभिराम शृंगार किया जाता है. मंदिर में मंडलियां एक से बढ़कर एक भजन गाती है.सावन में पुष्कर में जगत पिता ब्रह्मा के दर्शनों के साथ हरि हर की भक्ति की सरिता में श्रद्धालु गोते लगा रहे हैं.




















