कुचामनसिटी: कुचामन—डीडवाना जिले के नावां ब्लॉक में शिक्षा का अधिकार तो दूर, बच्चों की बुनियादी सुरक्षा भी खतरे में है. यहां के 170 सरकारी विद्यालयों में से 80 प्रतिशत यानी 136 स्कूल जर्जर अवस्था में हैं, जबकि 40 प्रतिशत स्कूल कंडम हालात में हैं. नावां के ग्रामीण क्षेत्रों में तो स्कूलों के हालात खतरनाक हैं ही शहर के स्कूल भी जर्जर स्थित में पहुंच चुके हैं.
नावां की राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रिंसिपल दीपक कुमार गौड़ ने बताया कि नावां शहर के रामसुख बियानी बालिका विद्यालय के एक कमरे की पट्टियां गत वर्ष बारिश में टूट गई थी. गनीमत रही कि यह घटना रात के समय हुई, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई. इस स्कूल के 10 कमरे जर्जर होने के कारण आज भी बंद हैं. शिक्षकों को किसी दूसरी जगह कक्षाएं चलानी पड़ रही है.
स्कूल बन जाता है तालाब: उन्होंने बताया कि नावां के नमक श्रमिक कॉलोनी स्थित महात्मा गांधी विद्यालय नंबर 12 में पूरा भवन बारिश के दिनों में तालाब जैसा नजर आता है. यहां कमरों से लगातार पानी टपकता है. राजकीय बॉयज स्कूल में भी कई कमरों की छतें टूटी हुई हैं और दीवारों में दरारें आई हैं. कब कोई बड़ा हादसा हो जाए, कहा नहीं जा सकता. भगवानपुरा गांव के राजकीय महात्मा गांधी विद्यालय में भी यही हाल है. पूरा विद्यालय पानी से भरा रहता है. अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से डरते हैं.
भवनों की मरम्मत के लिए भेजे पत्र: नावां ब्लॉक के कई विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने बताया कि वे सालों से जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग को जर्जर भवनों की मरम्मत के लिए पत्र भेज रहे हैं, लेकिन ये पत्र शिक्षा विभाग की फाइलों में कहीं खो जाते हैं. विभाग द्वारा स्कूल भवनों की स्थिति का प्रमाण मांगा जाता है. शिक्षकों से इंजीनियरिंग संबंधी सवाल पूछे जाते हैं, जबकि यह सार्वजनिक निर्माण विभाग का काम है.
स्कूलों का हो रहा सर्वे: डीडवाना-कुचामन के जिला शिक्षाधिकारी (माध्यमिक) डॉ. अजीत सिंह देशा ने बताया कि सभी स्कूलों का सर्वे कराया जा रहा है. जहां भी भवन कंडम (खतरनाक) स्थिति में हैं, वहां शिक्षण व्यवस्था का संचालन रोक दिया जाएगा.
बूटीनाथपुरा में स्कूल की पट्टियां गिरी: डीडवाना जिले के ग्राम बूटीनाथपुरा की राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय का भवन जर्जर हालत में है. भवन के बरामदे की 20 पट्टियां कुछ दिनों पहले ही भरभराकर गिर गईं थी. इसके बाद से विद्यार्थियों और अभिभावकों में भय का माहौल है. इसके स्कूली बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं. मजबूरी में बच्चों को पेड़ की छांव में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है. इस हादसे को 15 दिन गुजर चुके हैं, लेकिन अब तक ना तो शिक्षा विभाग और ना ही प्रशासन ने इस स्कूल की सुध ली है. इससे स्कूली बच्चे अब भी जर्जर स्कूल में ही अध्ययन करने को मजबूर हैं. ग्राम पंचायत शिव के सरपंच लालाराम ने बताया कि आज तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इस स्कूल का निरीक्षण नहीं किया. ग्रामीणों का कहना था कि राजस्व मंत्री विजय सिंह चौधरी को भी इस जर्जर स्कूल के बारे में ज्ञापन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. ब्लॉक शिक्षा अधिकारी भंवरलाल खोखर का कहना था कि बरामदे में दरारों की सूचना मिलने पर निरीक्षण किया गया था. इसकी रिपोर्ट तैयार कर जिला शिक्षा अधिकारी को भेजी की गई. विद्यार्थियों को आंगनबाड़ी केंद्र के सुरक्षित कक्ष में बैठने के निर्देश दिए गए हैं.




















