अजमेर: सावन मास में नाग पंचमी का विशेष महत्व है. भगवान शिव शंकर ने नाग प्रजाति को संरक्षण देने के लिए उन्हें अपने से जोड़ लिया. यही वजह है कि भगवान शिव को मानने वाले नाग पंचमी पर नागों की पूजा करते हैं. तीर्थ नगरी पुष्कर में नाग पंचमी पर सतयुग के नागलोक और वर्तमान में पंचकुंड के नाम से विख्यात नाग मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना शुरू कर दी. वहीं कालसर्प दोष के निवारण के लिए भी पंचकुंड और बूढ़ा पुष्कर में हवन और अनुष्ठान किए गए.
तीर्थ नगरी पुष्कर में पंचकुंड में नाग पंचमी पर श्रद्धालुओं का मेला लगा रहा. पंचकुंड में नाग कुंड का स्थान सतयुग से माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार जगत पिता ब्रह्मा ने पुष्कर में सृष्टि यज्ञ किया था. उस वक्त देवी देवताओं, यक्ष, गंधर्व, नाग सभी को आमंत्रित किया गया था. नागों को देखकर यज्ञ में मौजूद ऋषि, संत ,महात्माओं में भय का माहौल हो गया. तब भगवान ब्रह्मा ने नागों को पुष्कर के दक्षिण क्षेत्र में रहने का स्थान दिया. पंचकुंड में नाग का मंदिर भी है.




















