धौलपुर: जिले में लगातार बारिश से नदी, तालाब, झरने लबालब हैं. शहर से लेकर गांवों तक बाढ़ जैसे हालात हैं. भारी बारिश ने जनजीवन बुरी तरह प्रभावित किया है. सबसे ज्यादा परेशानी किसानों के सामने आई. खेत खलियान पानी से लबालब हैं. खरीफ की फसलें बर्बाद हो रही है. इस बीच, मौसम विभाग अगस्त में भी भारी बारिश की चेतावनी दे डाली है, जो किसान और प्रशासन के लिहाज से चिंताजनक है.
किसानों ने बताया कि खरीफ फसलें बुरी तरह बर्बाद हुई. बाजरा, दलहन, तिलहन, ग्वार, ज्वार, मक्का की फसलें पानी में डूबी है. मवेशी पालन पर भी संकट है. पानी से चारा बर्बाद हो गया. किसानों ने बताया कि इस बार मानसून समय से पहले आया. जून से बारिश शुरू हुई. जुलाई में बुवाई की, लेकिन फिर झमाझम का दौर शुरू हुआ. खेतों में अंकुरित हो रही फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई. लगातार दूसरी बार ऐसे हालात बने हैं. किसान फसल खराबे की गिरदावरी करा उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं.
चंबल और पार्वती ने मचाई तबाही: चंबल और पार्वती नदी के किनारे के सैकड़ों गांवों में भारी नुकसान हुआ. फसल बर्बाद होने के साथ लोगों के मकानों में क्षति पहुंची है. हालांकि अब चंबल और पार्वती नदी का जलस्तर घटने से प्रशासन ने राहत की सांस ली. इस बीच, बारिश का पानी शहर की कॉलोनियों एवं गांवों में घुसा है. गली मोहल्ले तालाब बने हुए हैं. मकानों में सीलन से गिरने का खतरा पैदा हो गया.
1.53 लाख हेक्टेयर बुवाई का लक्ष्य: जिले में फसल बुवाई का लक्ष्य 1.53 लाख हेक्टेयर है. कृषि विभाग के पर्यवेक्षक कौशलेंद्र शर्मा ने बताया कि बरसाती सीजन में करीब 94000 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें बोई थी. करीब 30000 हेक्टेयर में ज्वार, दलहन, तिलहन की बुवाई की गई. शेष बची जमीन में सब्जी एवं अन्य फसलें की जाती हैं. कृषि विभाग के मुताबिक, 20 हजार हेक्टेयर बाजरे की फसल बर्बाद हुई है.




















