इस बार रक्षाबंधन को लेकर लोगों में असमंजस है, क्योंकि श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि दो दिन (8 और 9 अगस्त) रहेगी. हालांकि धार्मिक पंचांगों के अनुसार राखी बांधने के लिए केवल शनिवार (9 अगस्त) को सूर्योदय के बाद करीब 5 घंटे का समय ही शुभ माना गया है. शुक्रवार को पूर्णिमा शुरू जरूर होगी, लेकिन भद्राकाल के चलते उस दिन राखी बांधना शुभ नहीं माना जाएगा. ऐसे में बहनें शनिवार सुबह से दोपहर तक भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकती हैं.
पंडित प्रेमी शर्मा ने बताया कि ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार श्रावण पूर्णिमा 8 अगस्त को दोपहर 2 बजकर 13 मिनट पर लगेगी और 9 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 13 मिनट तक रहेगी. हालांकि शुक्रवार को पूर्णिमा आरंभ हो रही है, लेकिन उस दिन भद्रा काल भी प्रभावी रहेगा, जिसे शास्त्रों में अशुभ माना गया है.
भद्रा समाप्ति के बाद शुभ मुहूर्त: पंडित प्रेमी शर्मा ने बताया पंचांगों के मुताबिक भद्रा काल शनिवार तड़के समाप्त होगा, जिसके बाद रक्षाबंधन मनाने का शुभ समय प्रारंभ होगा. ऐसे में 9 अगस्त को सुबह सूर्योदय के बाद से दोपहर 1:13 बजे तक का समय राखी बांधने के लिए श्रेष्ठ और शुद्ध माना गया है, यानी, भद्रा के हटने और पूर्णिमा के रहने के बीच मिलने वाले लगभग 5 घंटे का समय राखी बांधने के लिए पूर्णतः शुभ है. पंडित प्रेमी शर्मा ने बताया कि रक्षाबंधन केवल पारिवारिक त्योहार नहीं बल्कि भाई-बहन के आत्मीय रिश्ते का प्रतीक है. यह पर्व रक्षा और बंधन जैसे दो महत्वपूर्ण भावों को जोड़ता है. बहनें जहां भाइयों की लंबी उम्र और समृद्धि की कामना करती हैं, वहीं भाई जीवनभर उनकी रक्षा का वचन देते हैं.
राखी बांधने की विधि
- रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान के बाद बहनें पूजा का थाल तैयार करें
- इसमें राखी, अक्षत (चावल), रोली, दीपक, मिठाई और नारियल रखें.
- भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर बैठाएं
- रोली और चावल से भाई के माथे पर तिलक लगाएं
- दीपक से भाई की आरती उतारें
- रक्षा सूत्र को भाई की दाहिनी कलाई पर बांधें
- भाई को मिठाई खिलाकर प्रेम प्रकट करें
- भाई से उपहार और आशीर्वाद प्राप्त करें




















