जयपुर: राजस्थान में जल संकट झेल रहे जयपुर शहर के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आ रही है. रामगढ़ बांध पर कृत्रिम वर्षा की तैयारी पूरी कर ली गई है. करीब दो दशक से सूखे पड़े रामगढ़ बांध को अब क्लाउड सीडिंग तकनीक से भरने की ऐतिहासिक पहल की जा रही है. इस बार देश में पहली बार ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के माध्यम से कृत्रिम बारिश करवाई जाएगी.
इस परियोजना को अमेरिकी कंपनी Excel-1 अंजाम दे रही है, जिसे साउथ कोरिया से मंगवाए गए हाई-टेक ड्रोन से संचालन किया जाएगा. अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो राजस्थान में अन्य जल स्रोतों जैसे कालख बांध, मानसागर और कानोता बांध में भी कृत्रिम वर्षा की योजना पर अमल किया जा सकता है. यह प्रयोग केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिस्थितिकी की दृष्टि से भी ऐतिहासिक साबित हो सकता है.
ड्रोन से बादलों में सोडियम क्लोराइड का छिड़काव : कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि 31 जुलाई को शाम 3:00 बजे हजारों फीट ऊंचाई पर ड्रोन को उड़ाकर बादलों में सोडियम क्लोराइड डाला जाएगा, जिससे संघनन की प्रक्रिया से वर्षा के लिए अनुकूल जल बूंदें बनेंगी और कृत्रिम बरसात होगी. यह तकनीक अब तक विमान आधारित रही है, लेकिन रामगढ़ पर इसे ड्रोन के जरिए लागू किया जा रहा है.
31 जुलाई को होगा ऐतिहासिक लॉन्च : कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा खुद इस ऐतिहासिक पहल का नेतृत्व कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि 31 जुलाई को राजस्थान एक ऐसे ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनेगा, जब विज्ञान, आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समन्वय से रामगढ़ बांध में कृत्रिम वर्षा का अभिनव प्रयोग किया जाएगा. यदि यह प्रयोग सफल रहा तो यह जलसंकट से जूझते राजस्थान के लिए स्थायी समाधान का मार्ग प्रशस्त करेगा. कृषि मंत्री ने इस मौके पर ज्यादा से ज्यादा लोगों को रामगढ़ बांध पहुंच कर ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए भी अपील की है.
कृत्रिम बारिश की वैज्ञानिक प्रक्रिया :
- ड्रोन हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़कर बादलों में सोडियम क्लोराइड डालेगा.
- यह रसायन संघनन के लिए आवश्यक सूक्ष्म कणों की नकल करेंगे.
- जब बूंदें पर्याप्त भारी हो जाएंगी तो वर्षा की शुरुआत हो जाएगी.
कई महकमों के साथ दिखेगा तालमेल : रामगढ़ बांध पर कृत्रिम बारिश के लिए कृषि महकमे के साथ-साथ मौसम विभाग, जल संसाधन विभाग, सिंचाई विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ समन्वय देखने को मिलेगा. इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए सभी विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है. डीजीसीए (DGCA) से ड्रोन उड़ाने की अनुमति मिल गई है और तकनीकी निरीक्षण जारी है. कंपनी की तरफ से 1 महीने तक कृत्रिम वर्षा से संबंधित डेटा रिकॉर्ड किया जाएगा.
रामगढ़ बांध, 129 वर्षों की गौरवशाली विरासत : इतिहासकार जितेंद्र सिंह शेखावत बताते हैं कि रामगढ़ बांध की नींव महाराजा माधोसिंह द्वितीय ने 30 दिसंबर 1897 को रखी थी. यह बांध साल 1903 में बनकर तैयार हुआ था और 1925 में इसके जल से जयपुर को पानी देने की योजना बनी थी. जितेंद्र सिंह शेखावत के मुताबिक करीब 95 साल पहले रामगढ़ बांध से जयपुर तक लाई गई पेयजल योजना राजपूताना की पहली जल प्रदाय योजना थी. इसका सुझाव पंजाब सरकार के तत्कालीन दीवान अमरनाथ नंदा ने दिया था.
साल 1930 के दौर में सवाई राम सिंह जयपुर के शासक थे, तब उनके शासन में शुरू की गई पानीपेच की जलापूर्ति योजना अपर्याप्त हो गई थी. स्टेट कौंसिल ने दूसरी वैकल्पिक व्यवस्था के लिए बांडी नदी के बीच पाताल तोड़ कुएं बनाने, बांध से जलापूर्ति और कानोता के रामगढ़ पास ढूंढ नदी से जयपुर की प्यास बुझाने की योजना बनाने का सुझाव दिया था. शुद्ध पानी की आपूर्ति के लिए लक्ष्मण डूंगरी पर फिल्टर प्लांट लगाया गया.
रामगढ़ से जयपुर तक और शहर की गलियों में 110 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई गई. साल 1930 में अंग्रेज अफसर डी.ए. हौवेल की देखरेख में 17 इंच मोटी पाइपलाइन डाली गई और 1931 में वायसराय लार्ड इरविन ने जयपुर को रामगढ़ से पानी पहुंचाने की योजना का उद्घाटन किया. इसके बाद 1981 में आखिरी बार बांध पर चादर चली और 1982 में एशियाड नौकायन प्रतियोगिता ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई.
कृत्रिम वर्षा का पहले कहां-कहां हुआ प्रयोग ? : भारत में कृत्रिम वर्षा का इतिहास नया नहीं है. पहली बार 1951 में टाटा फर्म ने केरल में इसका प्रयोग किया था. इसके बाद महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और दिल्ली में भी प्रदूषण और सूखे की समस्या से निपटने के लिए क्लाउड सीडिंग की गई है, लेकिन यह पहली बार है जब ड्रोन और AI तकनीक के जरिए किसी बांध को भरने की पहल हो रही है.
शुरू हुआ ट्रायल : जयपुर का रामगढ़ बांध पहली बार कृत्रिम वर्षा की तकनीक का प्रयोग स्थल बनने जा रहा है. मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के मुताबिक देश में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब ड्रोन और AI से कृत्रिम वर्षा का परीक्षण किया जाएगा. प्रदेश के कृषि और उद्यानिकी विभाग की ओर से 31 जुलाई 2025 को दोपहर 3 बजे जमवारामगढ़ बांध से कृत्रिम बादलों से वर्षा कराने की तकनीक का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा. इसके पहले मंगलवार दोपहर को बांध पर ड्रोन उड़ा कर कृत्रिम बरसात का ट्रायल किया गया.




















