अलवर: इस साल अलवर जिले में मानसून की अच्छी बारिश होने से किसान गदगद हैं. अब किसान खेतों में लाल प्याज के बीज (कंठी) रोपने की तैयारी में जुटे हैं. अलवर लाल प्याज उत्पादन में देश भर में महत्वपूर्ण स्थान बना चुका है. अब प्याज के बीज तैयार करने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है. यही कारण है कि बाहरी राज्यों के किसानों की अलवर के प्याज के बीज की मांग बढ़ गई है. अब दूसरे राज्यों के किसान लाल प्याज की कंठी खरीदने के लिए अलवर आने लगे हैं.
प्याज मंडी संरक्षक अभय सैनी उर्फ पप्पू भाई प्रधान ने बताया कि इस बार लाल प्याज प्याज के बीज जिले में बड़ी मात्रा में तैयार किए गए हैं. उद्यान विभाग की ओर से इस साल अलवर जिले में लाल प्याज की फसल का रकबा बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है. अलवर जिले में लाल प्याज की बुवाई करीब 15 अगस्त के आसपास शुरू होती है. इसलिए किसान इन दिनों लाल प्याज की कंठी की बुवाई के लिए अपने खेतों को तैयार करने में जुटे हैं.
यूपी, एमपी, हरियाणा जा रहा बीज: कभी लाल प्याज के बीज का आयात करने वाला अलवर जिला अब इसका निर्यातक बन गया है. प्याज व्यापारी रुददार भाई ने बताया कि इन दिनों अलवर से लाल प्याज का बीज उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, बिहार, महाराष्ट्र, पंजाब सहित अन्य राज्यों में भेजा जा रहा है. बाहरी राज्यों में अलवर के बीज की बढ़ती मांग का कारण इसकी उच्च गुणवत्ता है. यही वजह है कि दूसरे राज्यों के किसान सीधे प्याज मंडी या बीज उत्पादकों के पास पहुंचकर बीज खरीद रहे हैं.फिलहाल, अलवर में लाल प्याज के बीज की कीमत 2200 से 2600 रुपए प्रति क्विंटल है, लेकिन मांग बढ़ने के साथ इसके दामों में तेजी की संभावना है.
अलवर के प्याज बीज से मिलता है बेहतर उत्पादन: अलवर में तैयार लाल प्याज के बीज की गुणवत्ता अच्छी होने से स्थानीय और बाहरी किसानों को बेहतर उत्पादन मिल रहा है. प्याज मंडी संरक्षक अभय सैनी ने बताया कि अलवर के बीज की उत्पादन क्षमता काफी अधिक है. एक बीघा में करीब छह क्विंटल बीज लगाया जाता है, जिससे 14 से 15 गुना तक पैदावार मिलती है. अलवर के लाल प्याज का उत्पादन अधिक होने के साथ-साथ बाजार में इसकी कीमत भी अच्छी मिलती है. इसकी वजह यह है कि अलवर के प्याज का रंग गहरा लाल होता है और स्वाद में यह काफी तीखा होता है.
नासिक के बाद अलवर के प्याज की मांग: देश में लाल प्याज की मांग महाराष्ट्र के नासिक के बाद अलवर की सबसे अधिक है. जब नासिक के प्याज की आवक कम होती है, तो अलवर के प्याज की मांग बढ़ जाती है. अलवर का लाल प्याज नवंबर-दिसंबर से बाजार में आना शुरू होता है और मार्च के अंत तक बिकता रहता है. हालांकि, अलवर के प्याज में नमी अधिक होने के कारण इसे लंबे समय तक स्टोर नहीं किया जा सकता.
डबल मुनाफा कमा रहे किसान: लाल प्याज अलवर के किसानों के लिए मुनाफे की फसल साबित हो रही है. किसान इससे दोहरा लाभ कमा रहे हैं – पहला, बीज (कंठी) बेचकर और दूसरा, अच्छी पैदावार से. लाल प्याज से अच्छी आमदनी होने के कारण हर साल इसका रकबा बढ़ रहा है.
प्याज का रकबा (हेक्टेयर में):
- 2019: 16,500
- 2020: 18,500
- 2021: 20,000
- 2022: 23,000
- 2023: 19,600
- 2024: 24,500
किसानों की राय: किसान जगदीश ने बताया कि वह लगभग 8 साल से प्याज की खेती कर रहे हैं. इस साल वह अपने 6 बीघे खेत में प्याज की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि वह अपना बीज खुद तैयार करके खेत में लगाते हैं, जिससे उन्हें अच्छी पैदावार मिलती है. पहले वह नासिक के बीज का उपयोग करते थे, जिसमें रोग लगने और उत्पादन कम होने की समस्या थी. पिछले 3 साल से वह अलवर के बीज का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे उन्हें बेहतर परिणाम मिल रहे हैं.प्याज की आमदनी से किसान बच्चों की पढ़ाई, घर बनाने और शादी जैसे खर्चों को आसानी से पूरा कर सकते हैं.




















