डॉक्टर्स को भगवान का रुप माना जाता है. आखिर माना भी क्यों ना जाए? जहां भगवान इंसान को बनाकर इस दुनिया में भेजते हैं, वहीं डॉक्टर्स इस धरती पर इंसान की तबियत का ध्यान रखते हैं. किसी भी तरह की बीमारी होने पर इलाज कर उसे ठीक करते हैं. लेकिन कई बार ऐसी बीमारियां इंसान को जकड़ लेती है कि धरती का भगवान भी कंफ्यूज हो जाता है. जयपुर में एक किशोरी की बीमारी ने भी डॉक्टर्स को ऐसा ही चकमा दिया और चौदह साल तक उसका गलत इलाज चला.
तीन साल की बच्ची को आने लगे पीरियड्स, 14 साल बदलती रही पैड, चार दिन में हुआ चमत्कार!
कैंसर की आशंका से निकाल दिया गर्भाशय (इमेज- फाइल फोटो)
जयपुर में एक ऐसा मेडिकल केस सामने आया है, जिसने सबको हैरान कर दिया. एक किशोरी, जिसके पीरियड्स मात्र तीन साल की उम्र में शुरू हो गए थे, आज चर्चा का विषय बनी हुई है. डॉक्टर्स की लापरवाही की वजह से किशोरी मौत के मुंह तक जा पहुंची थी. लेकिन अब उन्हीं डॉक्टर्स ने उसे ठीक भी कर दिया है.
डॉक्टर्स को भगवान का रुप माना जाता है. आखिर माना भी क्यों ना जाए? जहां भगवान इंसान को बनाकर इस दुनिया में भेजते हैं, वहीं डॉक्टर्स इस धरती पर इंसान की तबियत का ध्यान रखते हैं. किसी भी तरह की बीमारी होने पर इलाज कर उसे ठीक करते हैं. लेकिन कई बार ऐसी बीमारियां इंसान को जकड़ लेती है कि धरती का भगवान भी कंफ्यूज हो जाता है. जयपुर में एक किशोरी की बीमारी ने भी डॉक्टर्स को ऐसा ही चकमा दिया और चौदह साल तक उसका गलत इलाज चला.
राजस्थान के भरतपुर की एक 17 वर्षीय किशोरी का चौदह साल गलत इलाज चला. जिस बीमारी को डॉक्टरों ने कैंसर समझकर इलाज किया, वह वास्तव में वानविक ग्रुनबैक सिंड्रोम (Van Wyk-Grumbach Syndrome, VWGS) थी—एक ऐसी दुर्लभ जेनेटिक बीमारी, जिसके दुनिया भर में अब तक केवल 56 मामले दर्ज हैं. यह राजस्थान का पहला पुष्ट मामला है, जो चिकित्सा जगत में एक मील का पत्थर साबित हुआ है.
तीन साल से शुरू हुए थे पीरियड्स
किशोरी की कहानी उस समय शुरू हुई, जब वह केवल 3 साल की थी. इस असामान्य उम्र में उसका मासिक धर्म शुरू हो गया, जो बच्चों में बेहद दुर्लभ है. परिवार, इस लक्षण को गंभीर बीमारी का संकेत मानकर चिंतित हो उठा. कई अस्पतालों और डॉक्टरों के पास जाने के बावजूद सही निदान नहीं हो सका. किशोरी का शारीरिक विकास रुक गया, उसका वजन स्थिर हो गया और शरीर पर सूजन बढ़ने लगी. चिकित्सकों ने इन लक्षणों को ओवेरियन कैंसर से जोड़ा और इलाज शुरू किया. करीब आठ साल पहले, सोनोग्राफी में एक ओवरी में गांठ दिखने पर कैंसर की आशंका में उसकी एक ओवरी निकाल दी गई. लेकिन इस सर्जरी से कोई राहत नहीं मिली और परिवार ने लाखों रुपये खर्च कर दिए.
निकला जेनेटिक डिजीज
हाल ही में, जब किशोरी को जयपुर के जेके लोन अस्पताल के मेडिकल जेनेटिक्स विभाग में लाया गया, तब वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका माथुर और उनकी टीम ने गहन जांच शुरू की. डॉ. माथुर ने बताया कि किशोरी के लक्षण—जैसे समय से पहले यौन विकास, मासिक धर्म और रुका हुआ शारीरिक विकास—कुछ असामान्य संकेत दे रहे थे. उन्होंने थायराइड फंक्शन टेस्ट करवाया, जो आश्चर्यजनक रूप से पहले कभी नहीं किया गया था. जांच में पता चला कि किशोरी को वानविक ग्रुनबैक सिंड्रोम है, जो लंबे समय तक अनुपचारित हाइपोथायरायडिज्म के कारण होता है. इस बीमारी में थायराइड हार्मोन का उत्पादन बंद हो जाता है और अत्यधिक थायराइड-उत्तेजक हार्मोन (TSH) फॉलिकल-उत्तेजक हार्मोन (FSH) रिसेप्टर्स को सक्रिय करता है, जिससे ओवरी में सिस्ट और समय से पहले मासिक धर्म शुरू हो जाता है.
चार दिन में हुआ सुधार
डॉ. माथुर के अनुसार, किशोरी का वजन केवल 25 किलोग्राम और लंबाई 116 सेंटीमीटर थी, जो उसकी उम्र के लिए बहुत कम है. यह स्थिति ऑटोइम्यून थायराइडाइटिस के कारण थी, जो हाइपोथायरायडिज्म का सबसे आम कारण है. लेवोथायरोक्सिन थेरेपी शुरू करने के मात्र 15 दिनों में किशोरी की सूजन पूरी तरह गायब हो गई और चौथे दिन से सुधार दिखने लगा. किशोरी ने बताया कि वह पहले से बेहतर महसूस कर रही है. सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि 14 साल तक लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद एक साधारण थायराइड टेस्ट नहीं किया गया, जिसका मासिक खर्च 1,000 रुपये से भी कम है.




















