जयपुर: प्रदेश कांग्रेस में भले ही एकजुटता के लाख दावे किए जाते हों, लेकिन कहीं न कहीं पार्टी में गुटबाजी अभी भी हावी है. पूर्व सांसद रघुवीर मीणा और ताराचंद भगोरा सहित 10 से ज्यादा नेताओं ने मंगलवार को दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा के समक्ष प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की कार्यशैली को लेकर शिकायत की. इन दोनों नेताओं ने डोटासरा की कार्यशैली को लेकर आरोप लगाए हैं कि वे नेताओं की आंखों की किरकिरी बने हुए हैं. ताजा मामला वागड़ अंचल के नेताओं से जुड़ा है, जहां कई दिग्गज नेता डोटासरा की कार्यशैली की शिकायत लेकर दिल्ली पहुंचे और पार्टी हाईकमान के समक्ष अपनी बात रखी.
दरअसल, उदयपुर के पूर्व सांसद और कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य रहे रघुवीर मीणा, डूंगरपुर-बांसवाड़ा के पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा सहित करीब 10 से ज्यादा नेताओं ने मंगलवार को दिल्ली जाकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा से शिकायत की. उन्होंने आरोप लगाया कि डोटासरा आदिवासी अंचल में नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच फूट डाल रहे हैं. पार्टी हाईकमान ने इस मसले पर बातचीत करने का आश्वासन दिया.
डूंगरपुर में डोटासरा का तीखा बयान: 4 जुलाई को डूंगरपुर में हुए कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा की मौजूदगी में नेताओं का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधा था. डोटासरा ने कहा था कि यहां कांग्रेस इसलिए कमजोर हुई है क्योंकि नेता धड़ों में बंटे हुए हैं. जो लोग खुद को नेता कहते हैं, वे कार्यकर्ताओं की सुध नहीं लेते. चुनाव लड़ते हैं तो 25 हजार वोट आते हैं, टिकट कट जाता है तो दूसरे को हराने में लग जाते हैं. यह तरीका ठीक नहीं है. कार्यकर्ताओं की सुध लेनी होगी. उन्होंने यह भी कहा था कि यहां कार्यकर्ताओं में कोई कमी नहीं है, लेकिन जब तक नेता एकजुट नहीं होंगे, कांग्रेस मजबूत नहीं होगी. इसी तरह का बयान उन्होंने उदयपुर के कार्यकर्ता सम्मेलन में भी दिया था.
नेताओं का आरोप, अनदेखी हो रही: डूंगरपुर-बांसवाड़ा के पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा ने शिकायत में कहा कि वे लोग 35 साल से वागड़ अंचल में पार्टी को सींच रहे हैं, लेकिन डोटासरा उनकी अनदेखी कर रहे हैं. भगोरा ने कहा कि उनके भाई का देहांत हो गया था, इसलिए वे डूंगरपुर सम्मेलन में शामिल नहीं हो पाए थे. यह बात उन्हें पता थी, फिर भी वे सहानुभूति जताने तक नहीं आए. उल्टे मंच से टिप्पणी कर रहे थे, जो ठीक नहीं है. हमने पूरी ताकत से पार्टी को मजबूत किया है, लेकिन डोटासरा कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच गलतफहमी पैदा कर रहे हैं. उदयपुर के पूर्व सांसद रघुवीर मीणा ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि वे 35 साल से राजनीति में हैं. मंत्री और सांसद रहे हैं. कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य भी रहे हैं, लेकिन उदयपुर सम्मेलन में उन्हें मंच पर बैठने की जगह तक नहीं मिली. मीणा ने कहा कि क्या यह उनका अपमान नहीं है? डोटासरा को अपनी कार्यशैली बदलनी चाहिए. पार्टी में कोई धड़ेबाजी नहीं है, सब एकजुट हैं, लेकिन वे बेवजह विवाद खड़ा करते हैं.
वागड़ अंचल में कांग्रेस की चुनौतियां: वागड़ अंचल (उदयपुर ग्रामीण, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा) में महेंद्रजीत सिंह मालवीय, ताराचंद भगोरा और रघुवीर मीणा जैसे दिग्गज नेताओं का दबदबा रहा है. हालांकि, मालवीय कांग्रेस छोड़कर भाजपा में चले गए हैं, जबकि भगोरा और मीणा का प्रभाव कम हुआ है. इस बीच, भारत आदिवासी पार्टी (BAP) का प्रभाव बढ़ रहा है. वागड़ में BAP के चार विधायक और एक सांसद हैं.
कांग्रेस का कोर वोट बैंक खिसकने का खतरा: कांग्रेस नेताओं का मानना है कि वागड़ अंचल में आदिवासी हमेशा उनका कोर वोट बैंक रहा है, लेकिन 2018 में भारत ट्राइबल पार्टी (BTP) और अब BAP ने इस वोट बैंक में सेंध लगाई है. वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में BAP ने तीन सीटें जीतीं, जबकि बागीदौरा उपचुनाव और डूंगरपुर-बांसवाड़ा लोकसभा सीट पर भी उसे जीत मिली. BAP का बढ़ता प्रभाव कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है, इसलिए पार्टी ने अब इस क्षेत्र में संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं.




















