जोधपुर: राज्य सरकार ने आखिरकार जोजरी नदी में बहने वाले जहरीले पानी को उपचारित कर नदी का पुनरुद्धार करने की योजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली है. जल्द ही इसके टेंडर की प्रक्रिया शुरू होगी. हालांकि, इस काम को पूरा होने में अभी दो साल लगेंगे. तब तक 30 से 40 किमी के दायरे में रहने वाले लोगों को जहरीले जल का प्रकोप सहन करना पड़ेगा. राजस्थान के विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि जोजरी नदी के लिए स्वीकृत 176 करोड़ की योजना के लिए DPR तैयार हो गई है. अब टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी, जिसके बाद काम शुरू होगा. मंत्री पटेल ने यह भी स्वीकार किया कि वर्तमान स्थिति में ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ रही है, लेकिन अब जल्द ही इसका समाधान होगा.
लोकसभा चुनाव से पहले हुआ था शिलान्यास: लोकसभा चुनाव से पहले केंद्रीय जलशक्ति मंत्री रहते हुए गजेंद्र सिंह शेखावत ने नदी की पुनरुद्धार योजना का 15 मार्च 2024 को शिलान्यास किया था. तब दावा किया गया था कि यहां लगने वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और पानी निकासी की व्यवस्था से नदी का पानी इतना निर्मल हो जाएगा कि लोग इसके किनारे बैठकर चाय पी सकेंगे और किसान टमाटर की खेती कर सकेंगे. हालांकि नदी का पानी अब भी प्रदूषित ही है और उससे ही किसाना खेती कर रहे हैं. इस साल फरवरी में राज्य विधानसभा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 176 करोड़ की योजना के तहत काम करने की घोषणा की थी, लेकिन इसके पांच महीने बाद ही DPR तैयार हुई है.
दुर्गंध से पता चलता है कि गांव आ गए: जोजरी नदी में प्रदूषित पानी की स्थिति इतनी खराब है कि शाम को जोधपुर से धवा जाते समय बस जब भांढू गांव से आगे निकलती है, तो बदबू आने लगती है. यह संकेत होता है कि धवा आने वाला है. धवा से आगे राजेश्वर नगर, मैलबा, डोली और अराबा गांव के क्षेत्र में जाने पर जोजरी नदी में बहता काला, मटमैला और तेजाबी गंध वाला पानी हवा में जहर घोल देता है, जिससे सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है.
700 फैक्ट्रियों का जहरीला पानी आ रहा है नदी में: जोजरी नदी में जोधपुर के औद्योगिक इलाके की कई फैक्ट्रियों का अपशिष्ट पानी आता है, जिसमें स्टील और टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज का तेजाबी और केमिकलयुक्त पानी भी शामिल है. जोधपुर में लगभग 300 फैक्ट्रियां सरकारी अनुमति से चल रही हैं, लेकिन इतनी ही अवैध फैक्ट्रियां टेक्सटाइल के केमिकल युक्त पानी को नदी में छोड़ देती हैं. स्टील इकाइयों की संख्या भी लगभग 100 है.
बारिश में साफ हुआ था पानी: क्षेत्रवासी श्रवणराम ने बताया कि बारिश के दौरान पानी साफ हुआ था, लेकिन अब फिर काला पानी आ गया है, जो गांव और ढाणियों में घुस गया है. वर्तमान में नदी में रासायनिक पानी सालावास, नंदवान, राजेश्वर नगर, मैलबा, डोली और कल्याणपुर तक पहुंच चुका है. बता दें कि हाल ही में भारी बारिश के कारण जोजरी नदी में पानी का स्तर बढ़ने से डोली अराबा सहित कई गांवों में पानी भर गया था. इसके बाद प्रशासन ने इन्हें खाली करने का आदेश जारी कर दिया था.
संसद में उठाया था मामला: बाड़मेर के सांसद उमेदाराम बेनीवाल ने जोजरी और लूणी नदी में बह रहे प्रदूषित पानी का मुद्दा संसद में उठाया. उन्होंने कहा कि जोधपुर, पाली और बालोतरा में अवैध फैक्ट्रियों का बिना ट्रीटमेंट वाला पानी सीधे नदी में डाला जा रहा है, जिससे कल्याणपुर और अराबा गांव के स्कूल, अस्पताल और श्मशान घाटों में पानी भर गया है. लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. सांसद ने मांग की कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम भेजकर अवैध फैक्ट्रियों को बंद कराया जाए.
लूणी नदी की स्थिति भी गंभीर: मारवाड़ की ‘मरु गंगा’ कहलाने वाली लूणी नदी और उसकी सहायक नदियां भी प्रदूषण और अतिक्रमण की चपेट में हैं, जिससे नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है. एक समय था जब लूणी नदी साल में आठ महीने बहती थी और पूरे क्षेत्र में खेती व पीने के पानी की कमी नहीं थी, लेकिन अब भारी बारिश के अलावा यह नदी सूखी रहती है, और फैक्ट्रियों का रासायनिक पानी इसमें भर जाता है. अजमेर के नाग पहाड़ से निकलने वाली यह नदी राजस्थान के कई जिलों से होती हुई बाड़मेर के गांधव से गुजरात के कच्छ के रण में समाप्त होती है. इसका बहाव क्षेत्र 500 किमी से अधिक है. केन्द्र सरकार की संस्था शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (आफरी ) ने इस नदी को सुधारने के लिए पौधरोपण का मॉडल सरकार को सौंपा है.




















