भीलवाड़ा: शहर के आजाद चौक में शुक्रवार को डीएनटी (विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध-घुमंतु) समाज की ओर से 10 सूत्रीय मांगों को लेकर ‘महाबहिष्कार सम्मेलन’ आयोजित किया गया. इसमें प्रदेश भर से लगभग दस हजार महिलाओं और पुरुषों ने भाग लिया. समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो 1 नवंबर को राजस्थान के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों को जाम कर दिया जाएगा. इसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी.
राष्ट्रीय पशुपालक संघ एवं डीएनपी संघर्ष समिति के अध्यक्ष लालजी रायका ने बताया कि यह प्रदेश में डीएनटी समाज का चौथा महाबहिष्कार आंदोलन था. इससे पहले पाली, जोधपुर और जयपुर में भी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं. इस बार यह सम्मेलन भीलवाड़ा के आजाद चौक में हुआ. इसमें देश-प्रदेश के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों और समाजजनों ने बड़ी संख्या में भाग लिया.
रायका ने बताया कि राजस्थान सरकार की सूची में 32 डीएनटी समुदाय शामिल हैं, जबकि वास्तविक संख्या 50 से अधिक है. इनकी अनुमानित जनसंख्या 1 करोड़ 23 लाख हैं, जोकि राज्य की कुल जनसंख्या का 15% है, लेकिन शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में इनकी भागीदारी नगण्य है. समाज की आजादी के बाद प्रशासन,राजनीतिक, शिक्षा और व्यवसाय में कोई प्रभावी भागीदारी नहीं मिली है. कई लोगों के पास आज तक आवास नहीं है.
महापड़ाव करेंगे: उन्होंने कहा कि उन्होंने सरकार को 10 सूत्री मांगें दी थी. उन 10 मांगों के बारे में सरकार अनसुना कर रही है, इसीलिए हम आंदोलन की रहा पर हैं. समाज के नेताओं ने घोषणा की कि यदि सरकार जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती है, तो वे नवंबर में राष्ट्रीय राजमार्गों को बंद करने के साथ-साथ महापड़ाव भी आयोजित करेंगे. इस अवसर पर राजस्थान घुमंतु अर्ध-घुमंतु जाति परिषद के प्रदेश अध्यक्ष रतन नाथ कालबेलिया सहित प्रदेश भर से आए हजारों युवा, महिलाएं, पुरुष और स्थानीय नेता मौजूद रहे.
डीएनटी समाज की प्रमुख मांगें:
- समाज को अलग से 10% आरक्षण दिया जाए.
- पंचायतों में 10% हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाए.
- समाज के लोगों को उनकी बस्तियों की जमीन पर पट्टे दिए जाएं.
- बच्चों के लिए मॉडल स्कूलों की व्यवस्था की जाए.
- 1000 बच्चों को विदेश में पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति दी जाए.




















