जयपुर : झालावाड़ जैसा हादसा जयपुर में भी हो सकता है. जयपुर के सरकारी स्कूलों की तस्वीर ये बयां करती है. यहां तकरीबन 500 स्कूल ऐसे हैं, जहां मरम्मत की जरूरत है. इन स्कूलों में से कुछ को बजट अलॉट किया गया, लेकिन भवन मालिक या कोर्ट केस होने के चलते वहां जीर्णोद्धार का कार्य नहीं किया जा सका, जबकि कुछ स्कूलों की तो सुध ही नहीं ली गई. नतीजन यहां पढ़ने वाले छात्र डर के साए में हर दिन शिक्षा ग्रहण करने यहां पहुंचते हैं. ऐसे ही कुछ स्कूलों की पड़ताल करने के लिए ईटीवी भारत भी पहुंचा. इनमें से एक सिंधी कैंप बस स्टैंड के नजदीक था तो दूसरा परकोटे का केंद्र था. ये सचिवालय से महज तीन से चार किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है. बावजूद इसके, इन स्कूलों की सुध नहीं ली जा रही.
100 साल से पुराने भवन में चल रहा है स्कूल : झालावाड़ में सरकारी स्कूल में जो हादसा हुआ, ऐसा हादसा राजधानी जयपुर में भी हो सकता है, क्योंकि यहां के कई स्कूल 70 तो कुछ 100 साल से भी पुराने हैं, जिनकी बिल्डिंग पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. ये बिल्डिंग अब इसी तरह के हादसों को न्योता देते हुए नजर आ रही है. राजधानी के सिंधी कैंप स्थित उच्च माध्यमिक एवं प्राथमिक विद्यालय के भी हालत कुछ इसी तरह के हैं. यहां एंट्रेंस में जो बरामदा मौजूद है, उसके चूने का प्लास्टर हाल ही में गिरा था. हालांकि, इस दौरान स्कूल में कोई मौजूद नहीं था. इस वजह से किसी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं आई, लेकिन जिन कक्षा कक्ष में नवांकुर अपने भविष्य की इबारत गढ़ने के लिए अध्ययन कर रहे हैं, वहां के हालात इससे भी बदतर नजर आए.
उखड़ चुका प्लास्टर, अब टपकता सिर्फ पानी : यहां वर्तमान में करीब 250 छात्रों का नामांकन है. इनमें से कक्षा 6 से 12वीं तक के छात्रों को दूसरे भवन में शिफ्ट कर दिया गया है, लेकिन यहां जो कक्षा 1 से 5 तक की प्राथमिक कक्षाएं लग रही हैं, उनमें 100 छात्र हर दिन दुर्घटना की आशंका के बीच शिक्षा ग्रहण करते हैं. यहां प्रत्येक कमरे में छत से प्लास्टर उखड़ चुका है. सीधे छत की पट्टियां नजर आती हैं, जिसमें से बारिश के दौरान रिसता हुआ पानी खुद-ब-खुद इस विद्यालय के हालातों की पोल खोल कर रख देता है. इस संबंध में जब शिक्षकों से बातचीत की उन्होंने बताया कि 2023 से लगातार विभाग से पत्राचार चल रहा है. इसे लेकर वो खुद लाचार हैं. एहतियातन जहां छात्र सुरक्षित पढ़ सकते हैं, उन्हें वहीं बैठाया जाता है.
किराए के भवन में चल रहा है स्कूल : वहीं, स्कूल प्रिंसिपल अनिल यादव ने बताया कि स्थानीय विधायक की ओर से इस विद्यालय के जीर्णोद्धार को लेकर दो बार राशि स्वीकृत की जा चुकी है, लेकिन विद्यालय किराए के भवन में संचालित होने के कारण भवन मालिक यहां जीर्णोद्धार की अनुमति नहीं देता. इस संबंध में भवन मालिक राजीव पारीक ने बताया कि छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनके पिता ने खुद यहां गार्डर लगवाने का काम किया था.
इस विद्यालय के शिक्षा विभाग की ओर से महज ₹200 किराया दिया जाता है. वनस्थली मार्ग पर पहले ही कक्षा 6 से 12वीं तक के छात्रों को शिफ्ट किया जा चुका है. ऐसे में प्राथमिक कक्षाओं के छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बाकी बच्चों को भी वहां शिफ्ट किया जाना चाहिए. बहरहाल, इस विद्यालय में फिलहाल शिक्षा विभाग और भवन मालिक की तकरार का खामियाजा किसी दिन यहां पढ़ने वाले छात्रों को भुगतना पड़ सकता है.
आजादी के समय का स्कूल : कुछ इसी तरह के हालात परकोटा क्षेत्र में स्थित सरस्वती कुंड स्कूल के हैं. 1947 से संचालित इस स्कूल के हालात आज बेहद खराब हो चले हैं. इस भवन को अब जीर्णोद्धार की आवश्यकता आन पड़ी है, लेकिन विद्यालय परिसर पर कोर्ट केस होने के चलते यहां बार-बार शिकायत के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं. आलम ये है कि बरामदे, टॉयलेट और स्कूल के कमरे जर्जर हालत में हैं. बारिश के दिनों में पूरे कमरों में सीलन रहती है और आए दिन प्लास्टर भी गिरता रहता है. ये कहीं न कहीं इस विद्यालय के छात्रों और शिक्षकों के लिए परेशानी का सबक बना हुआ है.
हर दिन छात्रों को किया जाता सावधान : स्कूल के प्रिंसिपल महेंद्र गुप्ता ने बताया कि ये स्कूल प्राथमिक स्कूल के रूप में शुरू हुआ था. इसके बाद ये माध्यमिक और फिर 2020 से उच्च माध्यमिक स्कूल के रूप में संचालित है. स्टेट पीरियड के दौरान राजा-महाराजाओं ने ही इस इमारत को तैयार करवाया था. विद्यालय में समय-समय पर पीडब्ल्यूडी और शिक्षा विभाग की ओर से इसकी मरम्मत भी की गई, लेकिन ये बिल्डिंग ही इतनी पुरानी है कि मरम्मत के बावजूद यहां बारिश के दिनों में पानी रिसता है. इसकी वजह से हर कमरे में सीलन आती है और अनहोनी का खतरा भी बना रहता है. आलम ये है कि हर दिन सुबह प्रार्थना सभा में बच्चों को सावधान रहने के लिए कहा जाता है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो. डिस्प्यूटेड होने के चलते यहां विभाग भी विवश है और शिक्षक भी विवश है कि यहां नया निर्माण या वृहद मरम्मत नहीं कराई जा सकती. जब तक ये विवाद सुलझ नहीं जाता तब तक विभाग को स्कूल के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए.
मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में भी यही हालात ! : मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र सांगानेर से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे पुष्पेंद्र भारद्वाज ने सांगानेर क्षेत्र के स्कूलों की दुर्दशा का आरोप लगाया. भारद्वाज में बताया कि शिक्षा विभाग के साथ-साथ सार्वजनिक निर्माण विभाग ने भी इन स्कूलों को लेकर आंखे मूंद रखी हैं. क्षेत्र में एक नहीं दो नहीं बल्कि दर्जन भर से ज्यादा ऐसे स्कूल हैं, जहां बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है. ये स्कूल मूलभूत आवश्यकताओं को भी तरस रहे हैं.
प्रदेश में तकरीबन 8000 स्कूलों को मरम्मत की जरूरत : प्रदेश में आठ हजार स्कूल ऐसे हैं, जहां बारिश के दिनों छत टपकना सामान्य बात हो गई है. वहां दीवारें जर्जर हैं और प्लास्टर उखड़ रहा है. कई जगह स्कूल छत की गिरने से बचाने के लिए लकड़ी के पट्टों तक का इस्तेमाल किया जा रहा है. शिक्षा विभाग ने हाल ही आठ हजार स्कूलों का प्रस्ताव स्कूल शिक्षा परिषद को भेजा था. इनमें से महज दो हजार स्कूलों का चयन कर इनमें मरम्मत के लिए 175 करोड़ प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेज दिया. हालांकि, मरम्मत के लिए राशि अभी तक आवंटित नहीं की गई.
शिक्षा शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने अब सभी पीईईओ को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले राजकीय विद्यालयों में हर कमरे की भौतिक रिपोर्ट 30 जुलाई तक निर्धारित फॉर्मेट में भिजवाने के निर्देश दिए हैं. माना जा सकता है कि इस बार विभागीय अधिकारी फेक रिपोर्ट पेश करने के बजाए धरातल पर सही रिपोर्ट पेश करेंगे, ताकि जीर्णोद्धार की बाट जोह रहे स्कूलों का इंतजार खत्म होगा और छात्र सुरक्षित वातावरण में अपनी शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे.
शिक्षा शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने अगले 7-8 दिन तक शोक स्वरूप विभागीय कार्यालयों में कोई भी आयोजन नहीं करने के निर्देश दिए हैं. विभागीय अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंस करते हुए कृष्ण कुणाल ने कहा कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे हमारी जिम्मेदारी हैं. जो भी शिक्षक या अधिकारी लापरवाही करेंगे उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. शासन सचिव ने हर विद्यालय में प्राथमिक चिकित्सा सुविधा तैयार रखने और प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण के निर्देश भी दिए. वहीं, माध्यमिक और प्रारंभिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने सभी पीईईओ को विद्यालयों की फिजिकल रिपोर्ट 30 जुलाई तक पेश करने के निर्देश दिए. इसमें हर कमरे की फिजिकल रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया है.




















