जोधपुर: मारवाड़ में रसायनमुक्त खेती को बढ़ावा देने और फल एवं दलहन की तरफ किसानों का रुझान बढ़ाने की मंशा से जोधपुर स्थित कृषि विश्वविद्यालय बड़ी पहल करने जा रहा है. किसानों को प्राकृतिक खेती के नए तरीकों से रूबरू कराने को विश्वविद्यालय की ओर से विकसित कृषि मॉडल को आईसीएआर ने मंजूरी दे दी. इसके तहत एक प्रदर्शन इकाई विश्वविद्यालय में खुलेगी और तीन इकाइयां विश्वविद्यालय के कार्यक्षेत्र में स्थित प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के खेत में लगाई जाएगी. विश्वविद्यालय के कृषि क्षेत्र में लगातार नवाचार करते हुए अब प्राकृतिक खेती की दिशा में यह अहम कार्य है.
विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि आईसीएआर ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत प्राकृतिक खेती के लिए कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के मॉडल को स्वीकृति दी. विश्वविद्यालय किसानों के लिए प्राकृतिक खेती के ‘मॉडल फार्म ‘ की स्थापना करेगा. इन मॉडल फॉर्म से न सिर्फ मारवाड़ के किसान प्राकृतिक खेती के तौर तरीके सीखेंगे, बल्कि हानिकारक रसायनिक खाद के उपयोग से बढ़ रही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के निदान में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगा. हमारे मॉडल को स्वीकृति मिलना किसान व पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. यह ऐतिहासिक कदम किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए नई दिशा तय करेगा.
चार मॉडल फॉर्म की स्थापना: इस प्रोजेक्ट के कार्डिनेटर व निदेशक प्रसार शिक्षा, डॉ. प्रदीप पगारिया ने बताया कि आईसीएआर के भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मेरठ की ओर से विश्वविद्यालय के मॉडल का चयन किया गया है. चार प्रदर्शन इकाइयों में दलहनी, फलदार व अनाजों की खेती होगी. ये इकाइयां किसानों को बेहतर प्रशिक्षण देगी. इसके लिए बजट मिल गया. गौरतलब है कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन केंद्र की महत्वपूर्ण योजना है. इसका उद्देश्य देशभर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है.
ये होंगे फायदे
- रसायन-मुक्त खेती को बढ़ावा मिलेगा
- किसानों की आय में वृद्धि के साथ मानव स्वास्थ्य ठीक रहेगा
- मिट्टी की सेहत सुधरेगी
- पर्यावरण का संरक्षण होगा
- प्राकृतिक खेती किसानों की लागत व जोखिम घटाएगी व समान उपज देगी
- भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वस्थ धरा का निर्माण होगा
- मारवाड़ के किसान फल और दलहन का उत्पादन बढ़ा पाएंगे




















