यह कहानी नागपुर की है.असल में यहां के एक होनहार ने जेईई एडवांस्ड जैसी कठिन परीक्षा में 99.9 परसेंटाइल हासिल किए.उसका सेलेक्शन आईआईटी दिल्ली में एडमिशन के लिए हो भी गया लेकिन सब होने के बाद उसके पास एडमिशन के लिए फीस नहीं थी जब इस बात की जानकारी नागपुर के डॉक्टरों को लगी तो उन्होंने इस होनहार की मदद के लिए कमर कस ली. डॉक्टरों ने क्राउडफंडिंग के जरिए करीब 5 लाख रुपये जुटाकर इस युवक की पहली दो साल की फीस और रहने का खर्च उठा लिया.जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है.
कौन है ये स्टूडेंट और क्या थी परेशानी?
यह स्टूडेंट अपनी पहचान गुप्त रखना चाहता है इसलिए उसके नाम का खुलासा नहीं किया गया है.वह नागपुर का रहने वाला है. उसने JEE में शानदार 99.9 परसेंटाइल स्कोर किया लेकिन कोविड लॉकडाउन की मार ने उसके परिवार को कर्ज के बोझ तले दबा दिया. उसके पिता एक छोटा बिजनेस चलाते हैं. कर्ज होने के कारण उनकी सारी कमाई उसी में चली गई. ऐसे में जब लडके ने जेईई की परीक्षा पास की और IIT की फीस देने की बारी आई तो परिवार परेशान हो गया. आईआईटी दिल्ली में बीटेक में एडमिशन के लिए पहली किस्त 21 जुलाई तक जमा करनी थी.उनके लिए मुश्किल हो गई.
डॉक्टरों ने कैसे की मदद?
इस स्टूडेंट ने अपनी परेशानी अपनी स्कूल डायरेक्टर के जरिए करीब दो हफ्ते पहले सेंट्रल इंडिया डॉक्टर्स एसोसिएशन (CIDRA)के डॉक्टरों तक पहुंचाई. CIDRA के फाउंडिंग मेंबर और मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. काशिफ सैयद ने बताया कि जब उन्हें ये पता चला तो उन्होंने तुरंत क्राउडफंडिंग कैंपेन शुरू किया.डॉक्टरों की टीम ने मेहनत से 5 लाख रुपये जुटाए जो स्टूडेंट की पहली दो साल की फीस और रहने के खर्च को कवर करेगा.जमात-ए-इस्लामी हिंद ने भी आर्थिक मदद की पेशकश की, लेकिन परिवार ने जकात (चैरिटी) राशि लेने से मना कर दिया.इसलिए डॉक्टरों ने सिर्फ नॉन-जकात फंड्स ही इकट्ठा किए..
आसान नहीं था फंड जुटाना
CIDRA के ट्रेजरर और फिजिशियन डॉ.मेराज शेख ने कहा कि फंड जुटाना आसान नहीं था, क्योंकि परिवार जकात नहीं लेना चाहता था.उन्होंने ये भी जोड़ा कि कई लोगों ने सवाल उठाए कि क्या ये परिवार वाकई गरीब है. डॉ. शेख का मानना है कि ‘डिजर्विंग’ का मतलब सिर्फ बहुत गरीब लोगों तक सीमित नहीं होना चाहिए. इसमें वे लोग भी शामिल होने चाहिए जो न बहुत गरीब हैं, न बहुत अमीर, लेकिन मुश्किल में हैं. स्टूडेंट के पिता ने वादा किया है कि अगले दो साल में कर्ज खत्म होने के बाद वे खुद फीस का इंतजाम करेंगे.




















