इंटरनेशनल योगा डे के अवसर पर राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक अनोखी और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई. शहर के हसनपुरा इलाके में स्थित औलिया मस्जिद के परिसर में बुर्कानशीं मुस्लिम महिलाओं ने योगाभ्यास किया. यह योगाभ्यास कार्यक्रम सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स एंड सोशल वेलफेयर की ओर से आयोजित किया गया था.
जयपुर के औलिया मस्जिद के परिसर में बुर्कानशीं मुस्लिम महिलाओं के योगाभ्यास का निर्देशन संस्था की अध्यक्ष डॉ. सरोज खान ने किया. मस्जिद के कैंपस में लगभग पचास से अधिक मुस्लिम महिलाएं बुर्के में पूर्ण रूप से सज-धजकर योग करती हुई नजर आईं. इन महिलाओं ने अनुलोम-विलोम, कपाल भाति और योग की विभिन्न श्वास क्रियाओं का अभ्यास किया.
योग करते समय महिलाओं के चेहरे पर उत्साह और ऊर्जा स्पष्ट दिखाई दे रही थी. यह दृश्य उस सामाजिक सोच को चुनौती देता है जो योग को किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित समझती है. बुर्कानशीं मुस्लिम महिलाओं ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि योग किसी भी जाति, धर्म या समुदाय का मोहताज नहीं है, बल्कि यह हर व्यक्ति के लिए स्वास्थ्य और मानसिक शांति का माध्यम है.
योगाभ्यास कार्यक्रम के दौरान बुर्कानशीं महिलाओं ने कहा कि वे अपने रोजमर्रा के जीवन में योग को बहुत महत्वपूर्ण मानती हैं और घर पर भी नियमित रूप से इसका अभ्यास करती हैं. उनके अनुसार योग स्वास्थ्य और फिटनेस के लिए सबसे प्रभावशाली तरीका है, जिससे शरीर स्वस्थ और मन प्रसन्न रहता है.
महिलाओं ने यह भी कहा कि आज की बुर्कानशी मुस्लिम महिलाएं शिक्षा और करियर के क्षेत्र में भी बहुत आगे बढ़ चुकी हैं. महिलाएं डॉक्टर, इंजीनियर सहित विभिन्न सरकारी पदों पर कार्य रही हैं. योग का महत्व सभी जानते हैं, इसलिए योग से दूर रहना संभव नहीं. योग करने से न सिर्फ शरीर स्वस्थ रहता है बल्कि यह मन को सुकून भी प्रदान करता है.




















