जोधपुर : भारतीय क्रिकेटर रविंद्र जडेजा का घोड़ों के प्रति प्रेम किसी से छिपा नहीं है. खासतौर पर मारवाड़ी नस्ल के घोड़ों के प्रति उनका लगाव इतना गहरा है कि अब यह उनके क्रिकेट बैट पर भी नजर आने लगा है. इन दिनों जब जडेजा इंग्लैंड में खेल रहे हैं, तो उनके बैट पर साफ देखा जा सकता है एक खूबसूरत मारवाड़ी स्टेलियन (Marwari Stallion) की तस्वीर.
क्रिकेटर रविंद्र जडेजा के घोड़ों से प्रेम से हर कोई वाकिफ हैं. लेकिन इसमें भी वे मारवाड़ी नस्ल को कितना पसंद करते हैं. इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उनके क्रिकेट बैट जिससे वे छक्के चौके लगाते हैं उस पर भी मारवाड़ी नस्ल के घोड़े की तस्वीर लगी है. बाकायदा उस पर लिखा है मारवाड़ी स्टेलियन. जानकारों का कहना है कि स्टेलियन मारवाड़ी नस्ल के घोड़े की नर नस्ल हैं, जिसकी उत्पत्ति मारवाड़ क्षेत्र में हुई थी. ये घोड़े अपने विशिष्ट अंदर की ओर मुड़े हुए कानों के लिए जाने जाते हैं और भारत में विशेष रूप से राजपूताना परंपराओं में शक्ति, सुंदरता और सांस्कृतिक महत्व से जुड़े हैं. क्रिकेटर रविंद्र जडेजा ने अपने फार्म पर मारवाड़ी नस्ल के घोड़े रखें हैं. 2010 में जडेजा ने फार्महाउस के लिए यह घोड़े खरीदे थे, जिनकी देख रेख के लिए पूरी टीम लगा रखी हैं. खुद जडेजा भी इनके डाइट चार्ट से लेकर सेहत तक पर नजर रखते हैं. जब भी समय मिलता है, वे घुड़सवारी का आनंद लेते हैं.
4600 से ज्यादा रजिस्टर्ड हॉर्स : मारवाड़ी घोड़े की नस्ल को सुरक्षित करने के लिए जोधपुर के पूर्व महाराजा गज सिंह ने ऑल इंडिया मारवाड़ी और समिति की स्थापना की. समिति के मार्फत घोड़े की नस्ल को सुरक्षित किया जा रहा है. समिति के सचिव इंद्रजीत सिंह नाथावत ने बताया कि 4600 से अधिक घोड़े रजिस्टर्ड हो चुके हैं. इनके डीएनए से लेकर हर जानकारी का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है. आज इस नस्ल की मांग न सिर्फ राजस्थान या भारत, बल्कि विदेशों में भी तेजी से बढ़ रही है. उन्होंने बताया कि इस घोड़े की डिमांड राजस्थान के अलावा इन दिनों दक्षिण में भी बढ़ रही है और दुनिया में भी कई जगह घोड़े एक्सपोर्ट हो रखे हैं.
हर कोई इनका मुरीद : मारवाड़ी घोड़े की खूबसूरती, चाल और वफादारी ने न केवल आम लोगों बल्कि सेलिब्रिटीज को भी अपना दीवाना बना रखा है. मारवाड़ी नस्ल के घोड़े की सुंदरता, चाल और स्वभाव को देखकर हर कोई इसका मुरीद हो जाता है. देश के कई फिल्मी सितारे, राजनेता और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी इससे प्रभावित हैं. इस नस्ल के घोड़े न केवल खूबसूरत और शक्तिशाली होते हैं, बल्कि इनकी चाल, समझदारी और स्वामीभक्ति अद्वितीय है. सलमान खान, महेंद्र सिंह धोनी, यूसुफ पठान और सुखबीर सिंह बादल जैसे बड़े नाम भी इस नस्ल के घोड़े पाल चुके हैं. विदेशों में भी इसकी डिमांड रहती हैं.
धार्मिक मठों और ठिकाणों में संरक्षण : पहले मारवाड़ में श्रेष्ठ नस्ल के घोड़े मालाणी क्षेत्र यानी जालोर और बाड़मेर में होते थे, लेकिन अब इनका संरक्षण मठों और ठिकाणों में भी हो रहा है. होतीगांव, भालणीमठ, रामपुरामठ, देव दरबार (गुजरात), चोहठन मठ जैसे धार्मिक केंद्रों में घोड़ों की उत्तम देख रेख होती है. वहीं, जसोल, सिणधरी, नगर, गुड़ा, चीतलवाणा, सुराचंद, बाखासर, सेवड़ी, बड़गांव, रामसीन, सियाणा, कोरना, चौहठन, बागावास, भाद्राजून, पोसाणा और रोहट जैसे पूर्व जागीरदारों के ठिकाणों में आज भी नस्ल सुधार संरक्षण हो रहा हैं.




















