राजस्थान के भरतपुर जिले से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने न सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि सत्ता और पैसे के नशे में चूर एक युवक की ‘दादागिरी’ को भी उजागर किया है। यह मामला भरतपुर के रुदावल थाना परिसर का है, जहां सरपंच का बेटा हथियार लेकर न सिर्फ पहुंचा, बल्कि वहीं खड़े-खड़े इंस्टाग्राम रील बना डाली। यही नहीं, उसने नोटों से भरे बैग का भी वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया।
सरपंच का बेटा निकला सोशल मीडिया ‘स्टार’
वीडियो में नजर आने वाला युवक नगला तुला निवासी शिवा गुर्जर है, जिसकी उम्र 28 वर्ष बताई जा रही है। वह ठेकेदारी का काम करता है और उसके पिता साहब सिंह ग्राम पंचायत डुमरिया के पूर्व सरपंच रह चुके हैं। शिवा गुर्जर थाने में अपने पिता के साथ एक जमा हथियार (राइफल) लेने आया था। हथियार मिलने के बाद उसने रुदावल थाना परिसर में खड़े-खड़े हथियार हाथ में लिया, कैमरा ऑन किया और पुलिस की नाक के नीचे ‘दबंगई’ वाली रील शूट कर डाली।
हथियार, नोटों की गड्डियां और सोशल मीडिया पर बेशर्मी से पोस्ट
थाना परिसर में हथियार के साथ बनाई गई रील तो पहली हैरानी थी, लेकिन उसके बाद जो वीडियो वायरल हुआ, उसमें शिवा नोटों से भरे बैग के साथ दिखाई दे रहा है। इस वीडियो में वह खुलेआम पैसों की गड्डियों को दिखाते हुए अपनी रौब और रुतबे का प्रदर्शन कर रहा है। यह वीडियो 2022 का बताया जा रहा है, जब उसकी बहन की शादी के लिए वह बैंक से रुपए निकालकर लाया था। पर सवाल ये है कि आखिर ऐसे निजी वीडियो को सार्वजनिक कर सत्ता प्रदर्शन करने की जरूरत क्या थी?
पुलिस आई हरकत में, लेकिन देर से
वीडियो वायरल होते ही पुलिस महकमे में खलबली मच गई। रुदावल थाना प्रभारी बालकृष्ण ने तुरंत मामले को संज्ञान में लिया और युवक को पाबंद कर गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि पुलिस का यह एक्शन तब सामने आया, जब वीडियो सोशल मीडिया पर ताबड़तोड़ वायरल हो चुका था और आम लोगों में यह संदेश जा चुका था कि थानों में भी अब ‘रील कल्चर’ चल रहा है।
कानूनी दस्तावेजों के बावजूद दिखा ‘रौब’
थाना प्रभारी ने बताया कि शिवा के पास लाइसेंसी बंदूक और लाइसेंसी गाड़ी है। लेकिन सवाल यह नहीं कि हथियार वैध था या नहीं, बल्कि यह है कि थाना परिसर को हथियारों की नुमाइश और रील शूटिंग का अड्डा बना दिया गया। आम आदमी अगर थाने में मोबाइल निकालकर वीडियो बना ले तो पुलिस सख्ती से रोकती है, फिर ऐसे रसूखदारों को छूट क्यों?
राजनीतिक रसूख का असर?
शिवा गुर्जर की मां पार्वती देवी भरतपुर जिला परिषद की सदस्य हैं। परिवार की राजनीतिक पकड़ को देखते हुए यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि शिवा कानून व्यवस्था को ताक पर रखकर खुद को ‘राजनीतिक संरक्षण प्राप्त’ समझ बैठा। लेकिन अब पुलिस की ओर से उस पर पाबंदी की कार्रवाई की जा चुकी है और आगे की पूछताछ जारी है।
सवाल कई, जवाब अभी बाकी
इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली, राजनीतिक परिवारों के बच्चों की बढ़ती दबंगई और सोशल मीडिया के दुरुपयोग को एक बार फिर उजागर कर दिया है। क्या अब थाने भी राजनीतिक और पैसे के रसूख वालों के लिए स्टूडियो बनते जा रहे हैं? क्या ऐसे मामलों में सिर्फ गिरफ्तार करना ही पर्याप्त है या कड़ी कानूनी कार्रवाई की जरूरत है? फिलहाल भरतपुर पुलिस इस वायरल वीडियो से उठे सवालों का सामना कर रही है।




















