कोटा : कोटा रेल मंडल से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां बिना किसी पूर्व सूचना के कोटा से भोपाल तक एक स्पेशल ट्रेन (09822) को गुरुवार रात दौड़ा दिया गया. आमतौर पर रेलवे द्वारा स्पेशल ट्रेनों की जानकारी कम से कम 2 दिन पहले दी जाती है ताकि यात्री इसका लाभ उठा सकें, लेकिन इस बार ट्रेन चलने से महज 2 घंटे पहले ही इसका ऐलान किया गया. रेलवे ने इसे अनरिजर्व्ड ट्रेन बताया, जिसमें चार जनरल और पांच स्लीपर कोच सहित कुल 11 कोच लगाए गए थे. जानकारी के अभाव में इस ट्रेन में कोई भी यात्री नहीं चढ़ा, और यह लगभग खाली ही रवाना हो गई.
कोटा रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ जैन का कहना है कि भोपाल में अतिरिक्त भीड़ की आशंका है. इसी को देखते हुए कोटा से अनरिजर्व्ड करके ट्रेन भेजी गई है, ताकि वापसी में वहां के यात्रियों को लाया जा सके. इसीलिए तत्काल निर्णय करते हुए स्पेशल ट्रेन चलाई गई.
जोनल रेलवे उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति (ZRUCC) के सदस्य धीरज गुप्ता तेज का कहना है कि रेलवे के बिना प्रचार के इस तरह से ट्रेन चलाना हास्यास्पद लग रहा है. क्योंकि पूरी ट्रेन खाली गई है. रेल प्रबंधन को ट्रेन चलाने के संबंध में कब सूचना मिली और उन्होंने कब एक्शन लिया यह है, उन्हें बताना चाहिए. क्योंकि यात्रियों को इससे फायदा नहीं हुआ है. भोपाल और सीहोर में अगर अतिरिक्त भीड़ है तो यह निर्णय दोपहर में ही किया जा सकता था.
पहले पोस्ट की डिलीट, बाद में बता दिया ट्रेन को अनरिजर्व्ड : कोटा रेल मंडल ने रात 9:15 पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए ट्रेन के चलाने की घोषणा की , जिसमें यह ट्रेन रात को 11:10 पर चली है. यानी की ट्रेन चलने के महज 2 घंटे पहले यह घोषणा की गई है, जब इस पर सोशल मीडिया हैंडलर्स ने रेलवे को आड़े हाथों लिया. इसके बाद रेलवे ने तुरंत पोस्ट को डिलीट कर दिया. रात 10:08 पर दूसरा पोस्ट किया ,जिसमें उन्होंने लिखा है कि ट्रेन अनरिजर्व्ड रहेगी. हालांकि इसमें जनरल के साथ स्लीपर कोच लगाए गए हैं. ट्वीट के अनुसार यह ट्रेन रामगंज मंडी, भवानी मंडी, शामगढ़, चौमहला व विक्रमगढ़ आलोट रुकेगी. हालांकि इसके बाद भोपाल तक कई अन्य स्टेशन भी हैं, वह और कहां रुकेगी यह नहीं बताया गया है. ट्रेन एनटीईएस पर भी उपलब्ध नहीं थी.
यात्री ले रहे सोशल मीडिया पर चुटकी : इस पूरे मामले पर लोग कोटा रेल मंडल के एक्स हैंडल पर ही चुटकी ले रहे हैं. यहां तक की ट्रोल भी कर रहे हैं. एक यात्री लखन सिंह लिखते हैं कि इस ट्रेन की जानकारी सोशल मीडिया पर डालने के बाद कितने यात्री मिल जाएंगे, जबकि ना तो इसकी बुकिंग हो रही है ना ही यह NTES पर नजर आ रही है. एक दूसरे एक्स हैंडल ने इस पूरे मामले की जांच की ही बात कह दी है. उनका यह ट्रेन रेलवे के अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों के लिए तो नहीं चला दी. क्योंकि इस ट्रेन का किसी तरह से कोई प्रचार नहीं किया गया है. माना जा रहा है कि भोपाल के सीहोर स्थित पंडित प्रदीप मिश्रा के आश्रम में चल रही कांवड़ यात्रा में भीड़ को देखते हुए रेलवे ने यह ट्रेन चलाई. वहां हाल ही में कुछ हादसे भी हुए हैं, ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करने और यात्री सुविधा के लिए यह निर्णय लिया गया होगा. लेकिन सूचना न देना रेलवे की बड़ी चूक मानी जा रही है.




















