जैसलमेर: आज देशभर में कारगिल विजय दिवस की 26वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है. 1999 में इसी दिन भारत ने दुश्मन देश पर विजय प्राप्त कर कारगिल की चोटियों पर तिरंगा फहराया था. इस ऐतिहासिक युद्ध में भारतीय सेना की भूमिका प्रमुख रही. वहीं, सीमा सुरक्षा बल (BSF) का योगदान भी खासा योगदान रहा. जैसलमेर नॉर्थ सेक्टर में तैनात बीएसएफ के डीआईजी योगेंद्र सिंह राठौड़, जो युद्ध के समय चैन्निगुल सेक्टर में डिप्टी कमांडेंट के पद पर कार्यरत थे, उन्होंने शनिवार को उस दौर की यादें साझा की.
डीआईजी राठौड़ ने बताया कि, ‘कारगिल के ऊंचे और दुर्गम इलाकों में बीएसएफ के जवानों ने सेना के साथ कदम से कदम मिलाकर कार्य किया. हमारी जिम्मेदारी थी कि अग्रिम मोर्चों तक हर प्रकार की रसद और सुरक्षा पहुंचाई जाए.’ उन्होंने कहा कि बीएसएफ ने दुश्मन की गतिविधियों पर गहरी नजर रखी और खुफिया सूचनाएं सेना को उपलब्ध कराईं, जिससे समय पर जवाबी कार्रवाई की जा सकी. बीएसएफ का एक और बड़ा योगदान सीमावर्ती गांवों के नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और स्थानीय समन्वय बनाए रखने में रहा. जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील इलाकों में तैनात बीएसएफ ने न सिर्फ मोर्चों की निगरानी की, बल्कि नागरिकों को सुरक्षित रखने की भी जिम्मेदारी निभाई.




















