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ऑनलाइन गिरदावरी का कार्य शुरू, 70 लाख कृषकों को किया जाएगा प्रेरित

अजमेर: प्रदेश में 1 अगस्त से ऑनलाइन गिरदावरी का कार्य शुरू हो गया है. पटवारी और सर्वेयर ऑनलाइन गिरदावरी का काम कर रहे हैं. इस बार सेटलमेंट विभाग की बजाय राजस्थान राजस्व मंडल के अधीन ऑनलाइन गिरदावरी का काम हो रहा है. राजस्व मंडल के अधिकारी ऑनलाइन गिरदावरी पर नजर रखे हुए हैं.

इस बार किसानों को भी अपनी फसल अपनी गिरदावरी करने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है. राजस्व मंडल का प्रयास है कि कृषक अपने मोबाइल पर ऐप को डाउनलोड करके खरीफ की फसल की स्वंय गिरदावरी कर सके. राजस्व मंडल ने खरीफ गिरदावरी के लिए करीब 70 लाख कृषकों को स्वयं गिरदावरी करवाने का लक्ष्य भी रखा है.

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प्रदेश में शुक्रवार 1 अगस्त से ऑनलाइन गिरदावरी शुरू हो चुकी है. राजस्व मंडल के निबंधन महावीर प्रसाद ने बताया कि ऑनलाइन गिरदावरी शुरू होने से पहले गुरुवार को ही ऑनलाइन गिरदावरी का फील्ड निरीक्षण कर लिया गया है. अजमेर तहसील के बोराज गिरदावर सर्कल के कायमपुरा गांव स्थित कृषक अर्जुन सिंह के खेत पर लाइव टेस्टिंग की गई. ऑनलाइन गिरदावरी का पटवारी स्तर से सफल परीक्षण हुआ है.

उन्होंने बताया कि प्रदेश के समस्त जिलों में करीब साढ़े 4 करोड़ खसरे हैं. अजमेर जिले की बात करे तो साढ़े 17 लाख खसरे हैं. प्रत्येक पटवार हल्के में 6 से 7 हजार के करीब खसरे हैं. निबंधन महावीर प्रसाद ने बताया कि पटवारी और सर्वेयर मौके पर जाकर एप खोलेंगे. ऐप में आवश्यक ब्योरा जिसमें ऐप में खाता नम्बर, खाता धारक का नाम, फसल के बारे में ब्योरा भरना होगा.

अपनी फसल, अपनी गिरदावरी : गिरदावरी का कार्य पूर्व में सेटलमेंट विभाग करता आया है, लेकिन इस बार से राजस्व मंडल को गिरदावरी का जिम्मा मिला है. ऑनलाइन गिरदावरी के कार्य की राजस्व मंडल के अधिकारी मॉनिटरिंग कर रहे हैं. राजस्व मंडल में निबंधक महावीर प्रसाद ने बताया कि ऑनलाइन गिरदावरी पटवारी और सर्वेयर कर रहे हैं, लेकिन साथ में ही कृषकों को भी ऑनलाइन गिरदावरी करने के लिए जागरूक किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि खरीफ की फसल की गिरदावरी के लिए कृषकों को मोबाइल में ऐप डाउनलोड करना होगा. मौके पर ऐप के खोलने पर खातेदार का नाम, खसरा नंबर और फसल का ब्योरा उसमें भरना होगा. निबंधक महावीर प्रसाद ने बताया कि राजस्व मंडल का प्रयास है कि प्रदेश में 70 लाख कृषकों को ऑनलाइन गिरदावरी के लिए प्रेरित किया जाए.

ऑनलाइन गिरदावरी के लिए पटवारियों को टैबलेट के लिए दिए 12 हजार रुपये : प्रदेश में ऑनलाइन गिरदावरी के लिए प्रत्येक पटवारी को टैबलेट खरीदने के लिए 12 हजार रुपये दिए हैं. हालांकि, टैबलेट खरीदने के लिए 12 हजार रुपये काफी नहीं हैं. टैबलेट में सीयूजी नंबर की सिम लगेगी. पटवारी का जब ट्रांसफर या प्रमोशन होगा, तब उसकी जगह पर आने वाले अन्य पटवारी को टैबलेट सुपुर्द करना होगा.

फिलहाल, प्रदेश में कई पटवारी के प्रमोशन हुए हैं और वह गिरदावर बन गए. हालांकि, उन्हें अभी रिलीव नही किया गया है. ऑनलाइन गिरदावरी का काम उनसे लिया जा रहा है. यही वजह है कि पटवारी टैबलेट खरीदने में रूचि नहीं ले रहे हैं और अपने ही मोबाइल से गिरदावरी कर रहे हैं.

सर्वेयर को नहीं हुआ पिछला भुगतान : अजमेर पटवार मंडल के अध्यक्ष दीपक चौधरी बताते हैं कि पिछली गिरदावरी के लिए सर्वेयर को भुगतान अभी तक नहीं किया गया है. सर्वेयर को प्रत्येक ऑनलाइन गिरदावरी के लिए 10 रुपये प्रति गिरदावरी से भुगतान होना था. राजस्थान पटवार संघ की ओर से राजस्व मंडल से सर्वेयर के बकाया भुगतान की मांग भी की गई थी, लेकिन अभी तक भुगतान नहीं हुआ है.

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