राजस्थान के अजमेर में 243 करोड़ रुपये की लागत से बना रामसेतु पुल, जो शहर के विकास का प्रतीक बनने वाला था, उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद भारी बारिश में अपनी कमजोरी उजागर कर चुका है। यह पुल अब प्रशासनिक लापरवाही और घटिया निर्माण का जीता-जागता सबूत बन गया है। अदालत ने इसे बंद करने का आदेश दिया है।
कोर्ट का कड़ा रुख: तुरंत बंद हो पुल
अजमेर की ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-2 ने बुधवार को इस नवनिर्मित पुल को तत्काल बंद करने का आदेश दिया। जज मनमोहन चंदेल ने दो स्थानीय निवासियों की याचिका को जनहित याचिका मानते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने अजमेर नगर निगम (AMC) और अजमेर स्मार्ट सिटी लिमिटेड (ASCL) को 11 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका 5 जुलाई को दायर की गई थी, जिसके बाद कोर्ट ने जिला कलेक्टर, AMC और ASCL को नोटिस जारी किया था। 8 जुलाई को कोई भी पक्ष कोर्ट में पेश नहीं हुआ, जिसके बाद 9 जुलाई को सुनवाई हुई।
बारिश ने खोली हकीकत
3 जुलाई को हुई मौसम की पहली भारी बारिश ने इस पुल की नींव हिला दी। उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद इसकी संरचना में गंभीर खामियां सामने आईं। कोर्ट में यह खुलासा हुआ कि इस मेगा प्रोजेक्ट में एक्सपर्ट्स की सलाह को दरकिनार कर स्थानीय नागरिक फोरम के फैसलों पर भरोसा किया गया। नतीजा? एक ऐसा पुल, जो जनता की सुरक्षा के लिए खतरा बन गया।
आंशिक बंदी नाकाफी
अजमेर नगर निगम ने दावा किया था कि उन्होंने पुल के चार रास्तों में से एक को बंद कर दिया है। लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि चूंकि पूरे पुल में एक ही सामग्री का इस्तेमाल हुआ है, इसलिए पूरा ढांचा असुरक्षित है। इसीलिए पूरे पुल को बंद करने का आदेश दिया गया।




















