जयपुर : राजधानी की 13 साल की केसर पारीक के नाम एक और रिकॉर्ड दर्ज हो गया है. 21 जुलाई को उनका नाम इनफ्लुएंसर बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया है. इसी महीने उन्हें इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में ब्लाइंड फोल्ड बैडमिंटन के लिए लॉन्ग ड्यूरेशन का अवार्ड मिला था.
एशिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में भी दर्ज होगा नाम : केसर की मां नंदा ने बताया कि जल्द उनकी बेटी के नाम से एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी एक खिताब शामिल होने वाला है. हाल ही में इस सिलसिले में उन्हें कंफर्मेशन ईमेल प्राप्त हुआ है. उनका मानना है कि बेटी को इन सर्टिफिकेट्स के जरिए न सिर्फ चुनौतियों से पार पाकर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है, बल्कि केसर उन लोगों के लिए भी प्रेरणा बनकर उभरी हैं, जो अक्सर जीवन में हुई दुर्घटनाओं के कारण हार मान लेते हैं.
इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम : लंबे समय के लिए ब्लाइंड फोल्ड बैडमिंटन के लिए हाल ही में केसर का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज किया गया था. इस सफलता के लिए उन्होंने करीब 4 महीने तक जयपुर में एक संस्था से मिडब्रेन एक्टिवेशन और सेंसरी एन्हांसमेंट प्रोग्राम की ट्रेनिंग ली थी. इस ट्रेनिंग की वजह से वह इतनी सक्षम बन गई कि आंखों पर पट्टी बांधकर बैडमिंटन खेल सकी. इसी वजह से उसका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया.
ओलंपिक में जाने का है सपना : सातवीं कक्षा में पढ़ रही 13 साल की केसर पारीक के हौसले आसमान पर है. वह निशानेबाजी में भारत के लिए ओलंपिक में प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं. फिलहाल वह राज्य स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं और लगातार अभ्यास कर रही हैं. इसके अलावा केसर अच्छी डांसर भी हैं. केसर अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां को देती हैं. उन्हें स्केचिंग, पेंटिंग और ड्राइंग भी काफी पसंद है. केसर पारीक की मां नंदा पारीक के मुताबिक राइट हैंडेड होने के बाद जब उसने अपना वर्किंग हैंड गंवा दिया, तो केसर ने बाएं हाथ से लिखना और ड्रॉइंग बनाना सीख लिया. आज वह इतनी अच्छी तस्वीरें बनाती है कि देखने वाले हैरान रह जाते हैं.
हादसे में गंवा दिया था हाथ : केसर जब 10 साल की थी तो एक हादसे में उन्होंने अपना दायां हाथ खो दिया था. इसके बाद वह और उनके परिजन पूरी तरह से हिम्मत हार चुके थे. फिर केसर की मां ने अपनी बेटी को हौसला दिया और धीरे-धीरे वह अपनी बेटी को अलग-अलग क्षेत्र में ट्रेनिंग के लिए लेकर जाने लगी और फिर एक हाथ के साथ केसर ने अपनी जिंदगी को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ने के लिए पीछे मुड़कर नहीं देखा.




















