जयपुर: प्रदेश के स्कूलों में आरटीई में चयन के बावजूद भी छात्रों को प्रवेश नहीं मिल रहा है. जिसकी वजह से अभिभावक प्राइवेट स्कूलों के चक्कर काट रहे हैं. उन्हें कोर्ट का स्टे होने का हवाला दिया जा रहा है. हालांकि अब शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों को चेतावनी दी है कि आरटीई में प्रवेश नहीं देने की स्थिति उन पर मान्यता रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है.
23 जुलाई को प्रदर्शन करेंगे अभिभावक: आरटीई लॉटरी में चयनित होने के बावजूद भी जयपुर के मालवीय नगर निवासी छवि और तनुश्री का एक प्राइवेट स्कूल में प्रवेश नहीं हुआ. ऐसे सैकड़ों बच्चे हैं जिनका प्राइवेट स्कूल में सलेक्शन हुआ, लेकिन एडमिशन के लिए अब तक भटक रहे हैं. इन विद्यार्थियों के अभिभावकों ने बताया कि वे स्कूल जाते हैं तो उन्हें कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए प्रवेश से मना कर दिया जाता है. ऐसे में उन्होंने सरकार से मांग की है कि बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था करे. शिक्षा विभाग और प्राइवेट स्कूलों के बीच चल रहे विवाद में बच्चों की पढ़ाई का नुकसान नहीं होना चाहिए. वहीं संयुक्त अभिभावक संघ के प्रवक्ता अभिषेक जैन ने निजी स्कूलों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए आरटीई के तहत प्रवेश नहीं देने वाले स्कूलों के खिलाफ 23 जुलाई को शिक्षा संकुल में प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है.
शिकायतों पर ऐसे होगी कार्रवाई: हालांकि बीते दिनों प्रारंभिक शिक्षा निदेशक ने इस संबंध में आदेश जारी किए थे. आदेश में सभी जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्र के सभी प्राइवेट स्कूलों में कक्षा पीपी 3 प्लस और कक्षा 1 में प्रवेश देना सुनिश्चित करें. जो स्कूल प्रवेश देने से इंकार करते हैं और फीस की मांग करते हैं तो ऐसे स्कूलों के खिलाफ राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए. वहीं स्कूल शिक्षा शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने कहा कि शाला दर्पण में प्राइवेट स्कूल के पोर्टल पर शिकायतें डाली जा सकती हैं. शिकायत मिलते ही वो संबंधित डीईओ के पास पहुंचेगी. जिसकी जांच कर उन्हें रिपोर्ट पेश करनी होगी. यदि किसी स्कूल को भी अलॉटमेंट से शिकायत हो, तो वो भी अपील कर सकते हैं.
‘सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन, कोई रियायत नहीं’: उन्होंने कहा कि गरीब पात्र बच्चों को प्राइवेट स्कूल से जोड़ने का न सिर्फ शिक्षा विभाग का दायित्व है, बल्कि ये प्राइवेट स्कूलों की भी जिम्मेदारी है. इसलिए ये सिर्फ आरटीई एक्ट नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट की भी गाइडलाइन है. इसमें किसी भी तरह का शिथिलन नहीं है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो स्कूल आरटीई के तहत एडमिशन नहीं देंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. अंतिम कार्रवाई मान्यता रद्द करने की भी हो सकती है.




















