अलवर : भ्रमण पर अलवर आने वाले पर्यटकों को सरिस्का टाइगर रिजर्व के अलावा पर्यटन का नया विकल्प मिलेगा. पर्यटक सरिस्का में सफारी के अलावा अब शहर के समीप कटीघाटी क्षेत्र में बनने वाले बायोलॉजिकल पार्क में भी सफारी का आनंद ले सकेंगे. सरिस्का में बाघों के अलावा अब बायोलॉजिकल पार्क में पर्यटकों को लायन सफारी की सुविधा मिल पाने की उम्मीद जगी है. सउदी अरब की कंपनी इन दिनों बायोलॉजिकल पार्क की डीपीआर तैयार रही है, जिसे 30 सितम्बर तक पूरा करके वन अधिकारियों को सौंपा जाना है. इसके बाद निविदा प्रक्रिया पूरी कर वर्ष 2026 में बायोलॉजिकल पार्क की योजना मूर्तरूप लेने की संभावना है.
अलवर वन मंडल के डीएफओ राजेंद्र हुड्डा ने बताया कि प्रदेश सरकार की बजट घोषणा 2024-25 के तहत अलवर के कटीघाटी स्थित वन क्षेत्र में 100 हेक्टेयर भूमि पर बायोलॉजिकल पार्क बनाने की घोषणा की गई थी. इसके लिए राज्य सरकार से बजट भी जारी हो चुका है. बायोलॉजिकल पार्क की डीपीआर बनाने का कार्य जारी है. पार्क की डीपीआर तैयार करने के लिए सउदी अरब की कंपनी को जिम्मा सौंपा गया है. यह कंपनी भारत के अलावा विदेशों में भी पार्कों की डिजायन बनाने का कार्य करती है. अलवर के कटीघाटी पर स्थित आवंटित जमीन पर बायोलॉजिकल पार्क के सर्वे का कार्य सउदी अरब की कंपनी के प्रतिनिधियों की ओर से किया जा रहा है. कंपनी को पार्क की डीपीआर तैयार कर 30 सितम्बर तक वन विभाग को सौंपने को कहा गया है.
डीपीआर से पता चलेगा पार्क में कौन से वन्यजीव रहेंगे : डीएफओ हुड्डा ने बताया कि डीपीआर तैयार होने के बाद ही पता चल पाएगा कि बायोलॉजिकल पार्क में कौन-कौन से वन्यजीव रहेंगे. वैसे इस पार्क में टाइगर, लेपर्ड, भालू, सांभर, चीतल, शेर, चीता, बंदर, खरगोश, विभिन्न प्रकार की तितलियां, बर्डस सहित करीब 150 प्रजाति के वन्यजीवों को रखे जाने का प्रस्ताव है. 100 हेक्टेयर भूमि पर बनने वाले बायोलॉजिकल पार्क में 70 हेक्टेयर जमीन पर ग्रीनरी रहेगी, वहीं 30 हेक्टेयर भूमि पर चिड़ियाघर विकसित किया जाएगा. यह पार्क अलवर शहर के समीप कटीघाटी से जयसमंद बांध के समीप तक बनाने का प्रस्ताव है.
लायन सफारी के लिए कर रहे जगह चिह्नित : डीएफओ हुड्डा ने बताया कि बायोलॉजिकल पार्क की विशेषता यहां पर्यटकों को लायन सफारी की सुविधा मुहैया कराया जाना है. उन्होंने बताया कि पार्क की डीपीआर में सफारी का प्रावधान किया जाएगा. डीपीआर बनने के बाद पता चल पाएगा कि बायोलॉजिकल पार्क में लायन सफारी का रूट कौनसा रहेगा? कहां वन्यजीवों को रखने के लिए एनक्लोजर बनाया जाएगा?. वहीं, वन्यजीवों के लिए अस्पताल कहां तैयार होगा? पार्क की डीपीआर में अभी इनके लिए जगह चिह्नित की जा रही है.
सफारी के लिए सरिस्का के बाद होगा दूसरा विकल्प : अलवर जिले में अभी टाइगर रिजर्व सरिस्का पर्यटन का मुख्य केन्द्र हैं. यहां पर्यटकों के लिए टाइगर सफारी की सुविधा पहले से है और अब उन्हें सफारी का एक और विकल्प बायोलॉजिकल पार्क के रूप में मिल सकेगा. बायोलॉजिकल पार्क में पर्यटक लायन सफारी का आनंद ले सकेंगे.
सफारी का एक और विकल्प मिलने से बढ़ेंगे पर्यटक : अलवर जिले में हर साल हजारों की संख्या में देश-विदेश से पर्यटक भ्रमण के लिए आते हैं. इनमें ज्यादातर पर्यटक टाइगर रिजर्व सरिस्का में सफारी कर बाघ देखने के लिए आते हैं. अब अलवर में बन रहे बायोलॉजिकल पार्क में लायन सफारी का विकल्प मिलने से अलवर जिले में आने वाले पर्यटकों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी की उम्मीद है.
जिले के दो वन मंत्री होने का मिल रहा लाभ : केन्द्र सरकार और राज्य सरकार में वन मंत्री अलवर जिले से हैं. इसमें केन्द्र में भूपेन्द्र यादव एवं प्रदेश में संजय शर्मा वन मंत्री हैं. दोनों ही वन मंत्रियों का प्रयास अलवर को विश्व के मानचित्र पर तेजी से उभारने का है. इसी प्रयास के चलते अलवर जिले में टाइगर रिजर्व सरिस्का के बाद अब शहर में बायोलॉजिकल पार्क विकसित कराया जा रहा है.




















